जमीनी असर पर सीधा फोकस, अधिकारियों को सख्त निर्देश
कमरे में सन्नाटा था। फाइलें खुली थीं। लेकिन बात सिर्फ कागज की नहीं थी। मुख्यमंत्री ने सीधे मुद्दे पर चोट की। बोले—अगर योजनाएं आखिरी व्यक्ति तक नहीं पहुंचीं, तो पूरी मेहनत बेकार है।
उन्होंने मैदानी अमले को अलर्ट मोड में रहने को कहा। साफ शब्दों में—डिलीवरी ही असली टेस्ट है। अधिकारी अब रिपोर्ट नहीं, रिजल्ट दिखाएंगे।बैठक में मौजूद श्रम मंत्री लखन देवांगन ने भी विभागीय योजनाओं की प्रगति पर अपडेट दिया। बताया गया कि e-श्रम साथी ऐप के जरिए श्रमिकों का डेटा, रजिस्ट्रेशन और योजनाओं की ट्रैकिंग आसान होगी।
क्या बदलेगा e-श्रम साथी ऐप से?
यह सिर्फ एक ऐप नहीं। यह सिस्टम को तेज करने की कोशिश है।
- श्रमिकों का डिजिटल रजिस्ट्रेशन आसान होगा
- योजनाओं की जानकारी सीधे मोबाइल पर
- लाभ वितरण में पारदर्शिता
- फील्ड लेवल पर मॉनिटरिंग मजबूत
एक अधिकारी ने मीटिंग के बाद कहा—“अब हर क्लिक का हिसाब होगा। किसे लाभ मिला, किसे नहीं—सब साफ दिखेगा।”

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