- बड़ा फाउल: ईरान का दावा— अमेरिका ने 10-पॉइंट वाले प्रस्ताव की 3 बुनियादी शर्तें तोड़ीं।
- ट्रंप का डिफेंस: समझौते पर दस्तखत होने तक ईरान की सीमा के पास डटी रहेगी अमेरिकी सेना।
- मैच सस्पेंड: ईरानी संसद के स्पीकर ने बातचीत को पूरी तरह ‘बेकार’ करार दिया।
Donald Trump Iran Military Siege , तेहरान/वाशिंगटन — मिडिल ईस्ट के मैदान पर चल रही कूटनीतिक जंग अब ‘इंजरी टाइम’ में पहुंच गई है। ईरान ने अमेरिका पर सीजफायर समझौते की तीन अहम शर्तें तोड़ने का सीधा आरोप मढ़ दिया है। ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकेर गालिबाफ ने मोर्चा संभालते हुए कहा कि अब बातचीत का कोई मतलब नहीं रह गया है। दूसरी तरफ, डोनाल्ड ट्रंप ने भी अपनी रणनीति साफ कर दी है— जब तक उनकी शर्तों पर डील नहीं होती, अमेरिकी सेना ईरान को घेरे रखेगी।
मैदान का हाल: 10-पॉइंट प्रस्ताव पर फंसा पेंच
ईरान का कहना है कि उसने शांति की उम्मीद में जो कदम बढ़ाए थे, अमेरिका ने उस भरोसे को ‘क्लीन बोल्ड’ कर दिया है। गालिबाफ के अनुसार, अमेरिका ने उन बुनियादी प्रोटोकॉल का उल्लंघन किया है जो 10-पॉइंट शांति प्रस्ताव का आधार थे। यह विवाद उस वक्त गरमाया है जब पूरी दुनिया इस सीजफायर के जरिए तनाव कम होने की उम्मीद कर रही थी।
- ईरान का स्टैंड: अमेरिका ने 3 मुख्य शर्तों का उल्लंघन किया।
- प्रस्ताव: 10-पॉइंट शांति योजना अब खतरे में।
- ट्रंप की ‘प्रेसिंग’: अमेरिकी सेना की तैनाती ईरान के आसपास बरकरार रहेगी।
“अमेरिका ने बातचीत की टेबल पर धोखा दिया है। उन्होंने 10-पॉइंट प्रस्ताव की बुनियादी शर्तों को तोड़कर साबित कर दिया है कि वे शांति के प्रति गंभीर नहीं हैं। अब चर्चा का समय बीत चुका है।” — मोहम्मद बाकेर गालिबाफ, स्पीकर, ईरानी संसद

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