नई दिल्ली: हिंदू पंचांग के अनुसार, वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मोहिनी एकादशी कहा जाता है। साल 2026 में यह व्रत बेहद शुभ संयोगों के बीच रखा जा रहा है। शास्त्रों के अनुसार, मोहिनी एकादशी के नियम केवल व्रत के दिन ही नहीं, बल्कि एक दिन पूर्व यानी दशमी तिथि की सूर्यास्त से ही लागू हो जाते हैं। मान्यताओं के अनुसार, मोहिनी एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति के सभी पाप धुल जाते हैं और उसे मोह-माया के बंधनों से मुक्ति मिलती है। हालांकि, अनजाने में की गई छोटी सी भूल भी इस कठिन व्रत के पुण्य को कम कर सकती है।
दशमी से ही शुरू हो जाता है संयम
एकादशी व्रत का पालन करने वाले भक्तों को दशमी तिथि की शाम से ही सात्विक भोजन ग्रहण करना चाहिए। तामसिक भोजन जैसे लहसुन, प्याज या मांस-मदिरा का सेवन वर्जित है। व्रत का संकल्प लेने से पहले मन की शुद्धि भी उतनी ही आवश्यक है जितनी तन की।
मोहिनी एकादशी के नियम: इन 5 गलतियों से बचें
व्रत के दौरान पूर्ण लाभ प्राप्त करने के लिए बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए:
-
चावल का सेवन: एकादशी के दिन घर में चावल बनाना और खाना पूरी तरह वर्जित माना गया है। शास्त्रों के अनुसार इस दिन चावल खाना पाप का भागी बनाता है।
-
तुलसी दल तोड़ना: भगवान विष्णु को तुलसी अत्यंत प्रिय है, लेकिन एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते नहीं तोड़ने चाहिए। पूजन के लिए एक दिन पूर्व ही पत्ते तोड़कर रख लें।
-
वाद-विवाद और क्रोध: व्रत के दिन किसी की निंदा करना या क्रोध करना वर्जित है। इस दिन ब्रह्मचर्य का पालन और वाणी पर संयम रखना अनिवार्य है।
-
देर तक सोना: एकादशी की सुबह सूर्योदय से पहले उठना चाहिए। दिन के समय सोना व्रत के प्रभाव को कम करता है।
-
नशीले पदार्थों का सेवन: व्रत के दिन पान, सुपारी या किसी भी प्रकार के नशे से दूर रहना चाहिए।
दान और परोपकार का महत्व
मोहिनी एकादशी के नियम में दान-पुण्य का भी बड़ा स्थान है। व्रत के दिन किसी जरूरतमंद को अन्न, जल या वस्त्र का दान करना अत्यंत फलदायी माना जाता है। इस दिन ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप करते हुए रात्रि जागरण करने का भी विधान है।
पारण का सही समय
एकादशी व्रत का फल तभी पूर्ण होता है जब इसका पारण (व्रत खोलना) विधि-विधान से द्वादशी तिथि को शुभ मुहूर्त में किया जाए। हरि वासर के समय पारण करने से बचना चाहिए। पारण के समय भी सात्विक भोजन ही ग्रहण करना चाहिए।

More Stories
अमरनाथ गुफा का वो गुप्त रहस्य: पंचतत्वों से लेकर नंदी तक, शिव ने यात्रा मार्ग पर कहाँ और क्या-क्या त्यागा
Shukra Pradosh Vrat’ पर बना सर्वार्थ सिद्धि योग का महासंयोग, इस शुभ मुहूर्त में करें महादेव की पूजा
Bhanu Saptami 2026 : सूर्य देव की कृपा पाने का शुभ दिन, जानें पौराणिक और ज्योतिषीय महत्व