छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार में हाल ही में हुए मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर अब कानूनी विवाद खड़ा हो गया है। प्रदेश में तीन नए मंत्रियों को शपथ दिलाने के बाद कैबिनेट में मंत्रियों की संख्या 11 से बढ़कर 14 हो गई, जिसका कांग्रेस ने कड़ा विरोध किया था। अब यह पूरा मामला हाईकोर्ट पहुंच गया है।
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बिलासपुर हाईकोर्ट में इस मामले को लेकर एक जनहित याचिका दाखिल की गई है, जिसमें सामान्य प्रशासन विभाग, मुख्यमंत्री समेत सभी 14 मंत्रियों को पक्षकार बनाया गया है। यह याचिका कांग्रेस कार्यकर्ता बसदेव चक्रवर्ती द्वारा दायर की गई है।
क्या है याचिकाकर्ता का तर्क?
याचिकाकर्ता का तर्क है कि मंत्रिमंडल में सदस्यों की कुल संख्या विधानसभा की कुल सीटों की संख्या के 15 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकती। छत्तीसगढ़ विधानसभा में 90 सीटें हैं, जिसके अनुसार मंत्रियों की अधिकतम संख्या 13.50 होती है, जिसे सामान्यतः 13 माना जाता है। लेकिन, तीन नए मंत्रियों के शपथ लेने के बाद मंत्रियों की कुल संख्या 14 हो गई है, जो संविधान के अनुच्छेद 164 (1क) का उल्लंघन है।
हाईकोर्ट ने मांगा जवाब
इस मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस रमेश कुमार सिन्हा की डिवीजन बेंच में हुई, जिसमें हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब दाखिल करने के लिए कहा है। मामले की अगली सुनवाई मंगलवार, 2 सितंबर को होने की संभावना है।
गौरतलब है कि भाजपा ने मंत्रिमंडल विस्तार को प्रदेश के सामाजिक संतुलन और विकास की आकांक्षाओं के अनुरूप बताया था, जबकि कांग्रेस ने इस फैसले को संविधान के नियमों के खिलाफ बताते हुए एक मंत्री को हटाने की मांग की थी। अब यह मामला कोर्ट के दायरे में आने के बाद राजनीतिक गलियारों में इस पर गरमागरम बहस छिड़ गई है।

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