शेयर बाजार की गिरावट और छत्तीसगढ़ की अनदेखी
राजधानी रायपुर में मीडिया से चर्चा करते हुए भूपेश बघेल ने बजट के तुरंत बाद शेयर बाजार में आई गिरावट का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि जैसे ही वित्त मंत्री ने घोषणाएं पूरी कीं, निवेशकों का भरोसा डगमगा गया। सेंसेक्स और निफ्टी में बड़ी गिरावट इस बात का प्रमाण है कि बाजार ने इस बजट को नकार दिया है। बघेल ने दावा किया कि केंद्र सरकार ने राज्य की जरूरतों को नजरअंदाज किया है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से उल्लेख किया कि बजट में किसानों, युवाओं और मध्यम वर्ग के लिए कोई ठोस योजना नहीं है। उनके अनुसार, छत्तीसगढ़ के खनिज संसाधनों और बुनियादी ढांचे को निजी हाथों में सौंपने की तैयारी इस बजट की असलियत है।
विष्णु देव साय और विपक्ष के बीच वार-पलटवार
जहां मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस बजट को “विकसित भारत का रोडमैप” बताया है, वहीं बघेल ने इसे आंकड़ों की बाजीगरी कहा। बघेल ने कहा कि देश के आम बजट से जनता को बड़ी उम्मीदें थीं, लेकिन केंद्र ने एक बार फिर केवल बड़े उद्योगपतियों का ध्यान रखा है।
Voices from the Ground / Official Statements
“देश में इस बजट से किसी को कुछ नहीं मिला है। छत्तीसगढ़ को पूरी तरह से अडानी के लिए छोड़ दिया गया है। बजट के बाद शेयर मार्केट का धराशायी होना यह बताता है कि यह बजट अर्थव्यवस्था के लिए कितना घातक है।”
— भूपेश बघेल, पूर्व मुख्यमंत्री, छत्तीसगढ़
आम आदमी पर क्या होगा असर?
बघेल के इस बयान ने राज्य में राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है। आने वाले दिनों में कांग्रेस इस मुद्दे को लेकर सड़क पर उतरने की तैयारी में है। विशेषज्ञों का मानना है कि बजट में आयकर स्लैब और महंगाई को लेकर जो उम्मीदें थीं, उनके पूरा न होने से आम नागरिकों में भी मिश्रित प्रतिक्रिया है। रायपुर के सराफा बाजार और कपड़ा मार्केट में भी व्यापारी इस बजट के दूरगामी परिणामों को लेकर चिंतित नजर आ रहे हैं।

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