China-America , वॉशिंगटन/बीजिंग — दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं, अमेरिका और चीन के बीच अब एक नई और खतरनाक जंग शुरू हो गई है। यह जंग हथियारों की नहीं, बल्कि ‘करेंसी’ यानी मुद्रा की है। 2026 की शुरुआत के साथ ही चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने ‘स्ट्रॉन्ग युआन’ (Strong Yuan) का नारा बुलंद कर दिया है, जो सीधे तौर पर अमेरिकी डॉलर की बादशाहत को चुनौती दे रहा है। दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीतियों और भारी टैरिफ ने वैश्विक बाजारों में डॉलर की स्थिरता पर सवालिया निशान लगा दिए हैं।
हालिया अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की वैश्विक विदेशी मुद्रा भंडार में अमेरिकी डॉलर की हिस्सेदारी गिरकर 56.9% रह गई है, जो 1999 में 71% से अधिक थी। बीजिंग अब इसी मौके का फायदा उठाना चाहता है। 31 जनवरी 2026 को जारी एक आधिकारिक लेख में राष्ट्रपति जिनपिंग ने स्पष्ट किया कि चीन को एक ऐसी ‘मजबूत मुद्रा’ स्थापित करनी होगी जो अंतरराष्ट्रीय व्यापार, निवेश और विदेशी मुद्रा बाजारों में केंद्रीय भूमिका निभा सके।
इस आर्थिक खींचतान के बीच सोने (Gold) की कीमतों ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। जनवरी 2026 में सोना $5,100 प्रति औंस के ऐतिहासिक स्तर को छू गया है, क्योंकि निवेशक डॉलर से अपना भरोसा हटाकर सुरक्षित संपत्तियों की तलाश कर रहे हैं।
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