प्रश्नकाल में तीखी नोकझोंक: बजट घोषणाओं पर घेरा
सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी विधायकों ने एक सुर में सरकार से पूछा कि बजट में सम्मिलित किए गए कार्यों को अब तक वित्तीय हरी झंडी क्यों नहीं मिली है? विधायकों का तर्क था कि बिना वित्तीय स्वीकृति के धरातल पर काम शुरू नहीं हो पा रहे हैं। इस पर वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने जवाब देते हुए कहा कि प्रक्रियाओं का पालन किया जा रहा है और तकनीकी पहलुओं की जांच के बाद ही फंड जारी किया जाता है।
मंत्री के इस तकनीकी जवाब को विपक्ष ने “टालमटोल” करार दिया। विपक्ष के नेता ने आरोप लगाया कि सरकार केवल घोषणाएं कर रही है, लेकिन खजाने से पैसा जारी नहीं कर रही है। जब मंत्री के उत्तर से संतुष्टि नहीं मिली, तो नारेबाजी करते हुए विपक्षी सदस्य सदन से बाहर चले गए।
“सरकार विकास कार्यों को लेकर गंभीर नहीं है। बजट में काम तो डाल दिए गए हैं, लेकिन वित्त विभाग फाइलें दबाकर बैठा है। जब तक वित्तीय स्वीकृति नहीं मिलेगी, जनता को लाभ कैसे होगा? मंत्री जी के पास कोई ठोस समय सीमा नहीं है।”
— चरण दास महंत, नेता प्रतिपक्ष, छत्तीसगढ़ विधानसभा
“प्रक्रिया पारदर्शी है। हम पिछली सरकार की तरह बिना सोचे-समझे बंदरबांट नहीं कर रहे। नियमों के तहत वित्तीय स्वीकृति दी जा रही है। विपक्ष का वॉकआउट केवल उनकी हताशा दिखाता है, क्योंकि उनके पास कोई रचनात्मक मुद्दा नहीं है।”
— ओपी चौधरी, वित्त मंत्री, छत्तीसगढ़ शासन
सदन में जारी इस सियासी खींचतान का सीधा असर छत्तीसगढ़ के विकास प्रोजेक्ट्स पर पड़ रहा है।
- रुके हुए प्रोजेक्ट्स: सड़कों, पुलों और सामुदायिक भवनों के निर्माण की फाइलों को मंजूरी मिलने में देरी हो सकती है।
- ठेकेदारों का भुगतान: पुराने बकाया और नए टेंडरों की प्रक्रिया सुस्त रहने से स्थानीय रोजगार पर असर पड़ रहा है।
- स्थानीय प्रभाव: रायपुर और बिलासपुर जैसे शहरों के वार्डों में प्रस्तावित ड्रेनेज और लाइट सिस्टम के काम लटक सकते हैं।

More Stories
LIVE: छत्तीसगढ़ विधानसभा बजट सत्र, प्रश्नकाल की कार्यवाही
Child Labor Rescue : नाबालिगों को बंधक बनाकर काम कराने वाले फैक्ट्री मालिकों पर गिरेगी गाज
Chhattisgarh High Court : राज्य सरकार को झटका, हाईकोर्ट ने रजिस्ट्रार की सीधी नियुक्ति को बताया अवैध