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March 19, 2026

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Chhattisgarh Congress Dispute

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Chhattisgarh Congress Dispute : कांग्रेस की नई ‘टीम’ पर बवाल 13 नेताओं ने एक साथ छोड़ी पार्टी, बलरामपुर में संगठन बिखरा

  • बड़ा स्कोर: 11 पहले और अब 2 और मंडल अध्यक्षों ने दिया इस्तीफा। कुल आंकड़ा 13 पर पहुंचा।
  • गंभीर आरोप: चुनाव में विरोध करने वालों को मिली नई कार्यकारिणी में अहम जगह।
  • मुख्य विद्रोही: कन्दरी मंडल अध्यक्ष लालसाय मिंज ने पीसीसी चीफ दीपक बैज को भेजी चिट्ठी।

Chhattisgarh Congress Dispute , बलरामपुर — जिला कांग्रेस कमेटी की नई कार्यकारिणी का ऐलान होते ही बलरामपुर में पार्टी का आंतरिक अनुशासन ताश के पत्तों की तरह ढह गया। असंतोष की आग ने अब विकराल रूप ले लिया है। पहले जहां 11 पदाधिकारियों ने एक साथ इस्तीफा देकर मोर्चा खोला था, वहीं अब दो और मंडल अध्यक्षों ने पद त्याग दिया है। यह सीधे तौर पर जिलाध्यक्ष के चयन और उनकी नई ‘प्लेइंग इलेवन’ पर अविश्वास का संकेत है।

Chhattisgarh Congress Dispute : कांग्रेस की नई ‘टीम’ पर बवाल 13 नेताओं ने एक साथ छोड़ी पार्टी, बलरामपुर में संगठन बिखरा

लालसाय मिंज का ‘बाउंसर’: “विभीषणों” को दी गई कमान

कन्दरी मंडल अध्यक्ष लालसाय मिंज ने अपने इस्तीफे में तीखे प्रहार किए हैं। उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज को स्पष्ट रूप से बताया कि वर्तमान जिलाध्यक्ष ने उन लोगों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी हैं, जिन्होंने पिछले लोकसभा और विधानसभा चुनावों में खुलेआम बीजेपी का साथ दिया था। मिंज का आरोप है कि वफादार कार्यकर्ताओं को दरकिनार कर ‘भीतरघातियों’ को इनाम दिया गया है।

“कार्यकारिणी में उन लोगों को बैठा दिया गया है जिन्होंने चुनावों में पार्टी को हराने का काम किया। ऐसे में वफादार कार्यकर्ता खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।” — लालसाय मिंज, कन्दरी मंडल अध्यक्ष

पार्टी के भीतर यह विद्रोह तब शुरू हुआ जब नई लिस्ट में पुराने चेहरों और जमीनी कार्यकर्ताओं की अनदेखी की गई। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यह केवल पद का त्याग नहीं, बल्कि आगामी स्थानीय चुनावों से पहले एक बड़े शक्ति प्रदर्शन की तैयारी है। इस्तीफा देने वाले नेताओं की संख्या 13 तक पहुंचना यह बताता है कि संकट गहरा है और डैमेज कंट्रोल की कोशिशें अब तक नाकाम रही हैं। अगर पीसीसी चीफ दीपक बैज ने तुरंत हस्तक्षेप नहीं किया, तो बलरामपुर में कांग्रेस का संगठन पूरी तरह बिखर सकता है। कार्यकर्ताओं का बढ़ता आक्रोश यह साफ कर रहा है कि वे नई कार्यकारिणी को स्वीकार करने के मूड में नहीं हैं।

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