Chaitra Navratri 2026— 2026 की शुरुआत के साथ ही प्रदेश के शहरों और कस्बों में पहले दिन घटस्थापना और अखंड ज्योत की तैयारियां तेज हो गई हैं। गुरुवार सुबह से ही घरों और मंदिरों में पूजा की शुरुआत होगी। पहले दिन मां की विशेष पूजा की जाती है, जिसे स्थिरता और शक्ति का प्रतीक माना जाता है।
Chaitra Navratri 2026: पहले दिन मां शैलपुत्री पूजा की तैयारी तेज

पहले दिन की परंपरा: घटस्थापना और अखंड ज्योत
नवरात्र के पहले दिन साधक अपने घरों में कलश स्थापना करते हैं। मिट्टी के पात्र में जौ बोए जाते हैं। इसके बाद अखंड ज्योत जलाई जाती है, जो पूरे नौ दिनों तक जलती रहती है। पंडितों के अनुसार, सही मुहूर्त में की गई स्थापना को शुभ माना जाता है।
स्थानीय मंदिरों—जैसे पुराने शहर के प्रमुख देवी मंदिरों—में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ रहने की संभावना है। कई परिवारों ने पहले ही पूजा सामग्री की खरीदारी पूरी कर ली है।
मां शैलपुत्री का स्वरूप और महत्व
नवदुर्गा का पहला स्वरूप मां शैलपुत्री है। इन्हें हिमालय की पुत्री कहा जाता है। मान्यता के अनुसार, इस दिन पूजा करने से वैवाहिक जीवन की बाधाएं कम होती हैं और जीवन में स्थिरता आती है।
देवी का वाहन वृषभ है और वे दाहिने हाथ में त्रिशूल तथा बाएं हाथ में कमल धारण करती हैं। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, यह दिन चंद्रमा से भी जुड़ा होता है, इसलिए मानसिक शांति के लिए भी यह पूजा महत्वपूर्ण मानी जाती है।
पूजा विधि: कैसे करें मां शैलपुत्री की आराधना
- सुबह स्नान के बाद साफ स्थान पर कलश स्थापित करें
- मां शैलपुत्री की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें
- गंगाजल, अक्षत, फूल और पंचामृत अर्पित करें
- घी का दीपक जलाकर अखंड ज्योत स्थापित करें
- दुर्गा सप्तशती या शैलपुत्री मंत्र का जाप करें
मंत्र: कृपा प्राप्ति के लिए क्या जपें
“ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः”
— पारंपरिक दुर्गा उपासना मंत्र
स्थानीय पुजारियों का कहना है कि इस मंत्र का नियमित जाप करने से मन शांत रहता है और परिवार में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है।
स्थानीय असर: बाजारों में बढ़ी रौनक, मंदिरों में तैयारी
बाजारों में पूजा सामग्री की दुकानों पर भीड़ देखी जा रही है। फूल, नारियल और कलश की मांग बढ़ गई है। कई जगहों पर प्रशासन ने मंदिरों के आसपास ट्रैफिक व्यवस्था को लेकर अलर्ट जारी किया है।
रहवासी इलाकों में भी सुबह से भजन और शंख की आवाज सुनाई देने की उम्मीद है। परिवारों में उत्साह का माहौल है, खासकर महिलाओं और युवाओं में व्रत और पूजा को लेकर तैयारी चल रही है।

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