“आईडी बिना जानकारी नहीं”: ठगों के खिलाफ सख्त घेराबंदी
हमें मिली जानकारी के मुताबिक, जनगणना के नाम पर धोखाधड़ी की शिकायतों के बाद प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं. ठग अक्सर ‘डिजिटल जनगणना’ के नाम पर मोबाइल पर लिंक या क्यूआर कोड भेजते हैं, जिसे स्कैन करते ही बैंक खाता साफ हो सकता है. कार्तिकेय गोयल ने साफ तौर पर कहा कि पूरी जनगणना प्रक्रिया पूरी तरह से निःशुल्क है और किसी भी नागरिक से किसी भी स्तर पर कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा |
1 मई से शुरू होने वाले डोर-टू-डोर सर्वे के लिए लाखों गणनाकर्मियों को ट्रेनिंग दी गई है. जनगणना कार्यालय ने निर्देश दिया है कि नागरिक डेटा साझा करने से पहले कर्मचारी का आई-कार्ड जरूर मांगें. यह सर्वे सिर्फ़ आंकड़े जुटाना नहीं है, बल्कि अगले एक दशक की विकास योजनाओं का आधार है. रायपुर के शंकर नगर से लेकर बस्तर के सुदूर इलाकों तक, प्रशासन ने सुरक्षा का ऐसा चक्रव्यूह तैयार किया है कि फर्जीवाड़ा करने वालों की खैर नहीं |
“जनगणना का डेटा देश के भविष्य की तस्वीर है. लोग अक्सर मदद की भावना में अपनी निजी जानकारी या ओटीपी साझा कर देते हैं, जिसका फायदा अपराधी उठाते हैं. याद रखें, कोई भी सरकारी कर्मचारी आपसे बैंक डिटेल्स या पासवर्ड नहीं मांगेगा. सतर्कता ही इस डिजिटल मैच की असली जीत है.”

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