Chaitra Navratri 2026 नई दिल्ली। चैत्र नवरात्रि के तीसरे दिन मां मां चंद्रघंटा की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। इस वर्ष 21 मार्च को श्रद्धालु पूरे भक्तिभाव के साथ मां चंद्रघंटा की आराधना कर रहे हैं। मां को शांति, साहस और शक्ति की देवी माना जाता है, जिनकी कृपा से जीवन में सुख-समृद्धि और मानसिक शक्ति की प्राप्ति होती है।
पूजा का महत्व
धार्मिक मान्यता है कि मां चंद्रघंटा की पूजा करने से साधक के सभी भय दूर होते हैं और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। देवी के आशीर्वाद से बौद्धिक क्षमता बढ़ती है और पापों से मुक्ति मिलती है।
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पूजा विधि
सुबह स्नान कर साफ, विशेषकर लाल वस्त्र धारण करें। पूजा स्थान को गंगाजल से शुद्ध कर चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं और मां की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें।
इसके बाद अक्षत, सिंदूर, धूप-दीप और चमेली या कनेर के फूल अर्पित करें। माता को दूध से बनी मिठाई, खीर या शहद का भोग लगाएं। अंत में परिवार सहित आरती कर प्रसाद वितरित करें।
व्रत रखने वाले श्रद्धालु इस दिन फलाहार में चौलाई के साग का सेवन भी कर सकते हैं।
विशेष उपाय
मान्यता है कि ऋण से मुक्ति पाने के लिए मां चंद्रघंटा को गुड़हल के 108 फूलों की माला अर्पित करनी चाहिए।
मां चंद्रघंटा का स्वरूप
मां चंद्रघंटा का स्वरूप अत्यंत शांत और कल्याणकारी है। उनके मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र सुशोभित होता है, जिससे उनका नाम ‘चंद्रघंटा’ पड़ा। माता सिंह पर सवार रहती हैं और दस भुजाओं में त्रिशूल, गदा, तलवार, बाण, कमंडलु और माला सहित विभिन्न अस्त्र-शस्त्र धारण करती हैं।
मां चंद्रघंटा के प्रमुख मंत्र
- मूल मंत्र: ॐ देवी चन्द्रघण्टायै नमः॥
- बीज मंत्र: ऐं श्रीं शक्तयै नमः॥
- स्तुति मंत्र:
या देवी सर्वभूतेषु मां चंद्रघंटा रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ - ध्यान मंत्र:
पिण्डजप्रवरारूढा चण्डकोपास्त्रकैर्युता।
प्रसादं तनुते मह्यं चंद्रघंटेति विश्रुता॥

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