Chaitanya Baghel bail बिलासपुर, छत्तीसगढ़: छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को राज्य के बहुचर्चित शराब घोटाला मामले में बड़ी राहत मिलने की उम्मीद जगी है। उनकी जमानत याचिका पर सोमवार (4 नवंबर, 2025) को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में सुनवाई हुई, जिसके बाद अदालत ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) को नोटिस जारी कर इस पर अपना जवाब (काउंटर एफिडेविट) दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई अब 18 नवंबर को निर्धारित की गई है।
सुप्रीम कोर्ट में भी हुई थी सुनवाई
31 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में चैतन्य बघेल की जमानत याचिका पर सुनवाई हुई थी। शीर्ष अदालत ने ईडी को दस दिनों के भीतर काउंटर एफिडेविट दाखिल करने का निर्देश दिया था। उस दौरान चैतन्य की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने पैरवी की, जबकि ईडी की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू मौजूद थे।
चैतन्य बघेल की गिरफ्तारी और आरोप
ईडी ने 18 जुलाई को चैतन्य बघेल को उनके भिलाई स्थित आवास से गिरफ्तार किया था। एजेंसी का आरोप है कि शराब घोटाले से लगभग 16.70 करोड़ रुपए की अवैध राशि चैतन्य बघेल को प्राप्त हुई, जिसे उन्होंने रियल एस्टेट कारोबार में निवेश किया। जांच में यह भी सामने आया कि विठ्ठलपुरम प्रोजेक्ट में नकद लेनदेन और फर्जी फ्लैट खरीद के जरिए यह रकम लगाई गई।ईडी ने बताया कि बैंकिंग रिकॉर्ड से स्पष्ट हुआ कि यह रकम शराब सिंडिकेट से जुड़े व्यक्तियों के माध्यम से चैतन्य तक पहुंची।
राजनीतिक और कानूनी हलकों में बढ़ी हलचल
चैतन्य बघेल की जमानत याचिका पर हाईकोर्ट में सुनवाई के बाद राजनीतिक और कानूनी हलकों में बहस शुरू हो गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि जमानत मामले का निर्णय आने के बाद राजनीतिक और कानूनी परिदृश्य पर इसका बड़ा असर पड़ सकता है।मामले की अगली सुनवाई 18 नवंबर को होगी, जिसमें ईडी द्वारा प्रस्तुत काउंटर एफिडेविट और अदालत में पेश होने वाले तर्क पूरे मामले की दिशा तय करेंगे।

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