CG Politics : बिलासपुर। भिलाई नगर से कांग्रेस विधायक देवेंद्र यादव को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में दाखिल नामांकन पत्र से जुड़े विवाद में हाईकोर्ट ने उनकी उस प्रारंभिक अर्जी को खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने चुनाव याचिका को शुरुआती स्तर पर ही निरस्त करने की मांग की थी। अदालत के इस फैसले के बाद अब मामले की नियमित सुनवाई होगी। यह चुनाव याचिका पूर्व विधानसभा अध्यक्ष और भाजपा नेता प्रेम प्रकाश पांडेय की ओर से दायर की गई है।
क्या है पूरा मामला?
वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में भिलाई नगर सीट से कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में देवेंद्र यादव ने चुनाव जीता था। चुनाव परिणाम के बाद भाजपा प्रत्याशी और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष प्रेम प्रकाश पांडेय ने हाईकोर्ट में चुनाव याचिका दायर कर आरोप लगाया कि नामांकन पत्र दाखिल करते समय देवेंद्र यादव ने अपने खिलाफ दर्ज कुछ आपराधिक मामलों की पूरी जानकारी चुनावी हलफनामे में प्रस्तुत नहीं की।
याचिका में दावा किया गया कि उम्मीदवार के लिए अपने खिलाफ लंबित सभी आपराधिक मामलों की जानकारी देना कानूनी रूप से अनिवार्य है और यदि ऐसा नहीं किया गया है तो यह चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने वाला विषय हो सकता है।
हाईकोर्ट ने खारिज की प्रारंभिक अर्जी
मामले की सुनवाई के दौरान देवेंद्र यादव की ओर से अदालत में यह आग्रह किया गया था कि चुनाव याचिका सुनवाई योग्य नहीं है, इसलिए इसे प्रारंभिक स्तर पर ही खारिज कर दिया जाए। हालांकि, हाईकोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया और अर्जी खारिज कर दी।
अदालत के इस आदेश के बाद अब चुनाव याचिका पर नियमित सुनवाई होगी, जिसमें दोनों पक्ष अपने-अपने तर्क और साक्ष्य अदालत के समक्ष प्रस्तुत करेंगे।
अब नियमित सुनवाई में होगी तथ्यात्मक जांच
हाईकोर्ट के फैसले का अर्थ यह नहीं है कि अदालत ने आरोपों को सही या गलत मान लिया है। अदालत ने केवल यह माना है कि याचिका में उठाए गए मुद्दों पर विस्तृत सुनवाई आवश्यक है। नियमित सुनवाई के दौरान यह जांच की जाएगी कि नामांकन पत्र और हलफनामे में दी गई जानकारी चुनावी कानूनों के अनुरूप थी या नहीं।
मामले में दोनों पक्षों को अपने दस्तावेज, कानूनी तर्क और संबंधित साक्ष्य प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा। इसके बाद अदालत उपलब्ध तथ्यों और कानून के आधार पर अपना निर्णय सुनाएगी।
हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद प्रदेश की राजनीति में इस मामले को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। कांग्रेस और भाजपा दोनों की नजर अब अदालत की आगामी सुनवाई पर टिकी हुई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनावी हलफनामे और नामांकन प्रक्रिया से जुड़े मामलों में न्यायालय का अंतिम फैसला भविष्य में ऐसे मामलों के लिए महत्वपूर्ण कानूनी संदर्भ बन सकता है।
फिलहाल अदालत ने केवल नियमित सुनवाई का रास्ता साफ किया है। मामले में अंतिम निर्णय विस्तृत सुनवाई और दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद ही आएगा। ऐसे में अब इस चुनाव याचिका की अगली सुनवाई और अदालत की आगे की कार्यवाही पर सभी की निगाहें बनी रहेंगी।

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