महिला प्रतिनिधियों की जगह अब नहीं बैठेंगे रिश्तेदार
राज्य सरकार को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि कई पंचायतों में निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों की जगह उनके पति या परिवार के लोग फैसले ले रहे हैं। बैठकों में दस्तखत से लेकर योजनाओं के संचालन तक में बाहरी दखल देखा गया। अब विभाग ने इस पर सख्त रुख अपनाया है। निर्देश में कहा गया है कि पंचायतों में महिलाओं को दिया गया आरक्षण केवल कागजी व्यवस्था नहीं है। सरकार चाहती है कि महिलाएं खुद निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा बनें। गांव की सड़क, पानी, राशन और विकास योजनाओं पर अंतिम राय निर्वाचित प्रतिनिधि की ही हो।
Petrol Diesel Price Hike : 2 साल का रिकॉर्ड टूटा , लंबे समय बाद फिर महंगे हुए पेट्रोल और डीजल
तकनीक से होगी निगरानी
पंचायत विभाग ने जिला और जनपद स्तर के अधिकारियों को निर्देश भेजे हैं कि बैठकों की उपस्थिति रिकॉर्ड सुरक्षित रखा जाए। कई जगहों पर डिजिटल उपस्थिति प्रणाली लागू करने की तैयारी है। अधिकारियों का कहना है कि बायोमीट्रिक अटेंडेंस और फेस रिकॉग्निशन सिस्टम से फर्जी उपस्थिति पर रोक लगेगी। गांवों में अक्सर यह देखा गया कि महिला सरपंच का नाम आगे रहता था, लेकिन बैठकों में फैसले कोई और लेता था। इस बार सरकार ने सीधे उसी व्यवस्था पर चोट की है। पंचायत भवनों में अब माहौल बदलने की चर्चा शुरू हो गई है।
ग्राउंड पर क्या बदल सकता है?
राजनीतिक जानकार मानते हैं कि इस फैसले का असर सिर्फ बैठकों तक सीमित नहीं रहेगा। इससे पंचायत स्तर पर महिलाओं का आत्मविश्वास बढ़ेगा। कई महिला प्रतिनिधि अब खुद अधिकारियों से संवाद करेंगी और योजनाओं की निगरानी संभालेंगी। रायपुर के एक पंचायत अधिकारी ने बताया कि कई बार बैठकों में महिला प्रतिनिधि दिखाई ही नहीं देती थीं। पूरा संचालन उनके पति संभालते थे। “अब नियम साफ है। निर्वाचित व्यक्ति ही बैठक में बैठेगा,” अधिकारी ने कहा।

More Stories
Chhattisgarh High Court की सख्त टिप्पणी , देरी के लिए सरकार की दलीलों को कोर्ट ने माना अपर्याप्त
Amit Shah का रिटर्न गिफ्ट , छत्तीसगढ़ के लिए बड़े केंद्र-प्रायोजित प्रोजेक्ट्स की घोषणा संभव
CG Govt Expenditure : बजट का सही इस्तेमाल , विकास कार्यों के लिए फंड बचाने की कवायद, गैर-जरूरी खर्चों पर रोक