गबन का मामला और गिरफ्तारी का घटनाक्रम
महिला प्रधान आरक्षक मोनिका गुप्ता पर पुलिस मालखाने में रखे जब्ती के सोने के गहनों में हेराफेरी और गबन (Embezzlement) का गंभीर आरोप है। जांच के बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया था। चूंकि गिरफ्तारी के समय वह पूर्ण गर्भावस्था के दौर में थी, इसलिए अदालत के आदेश पर उसे जेल में उचित चिकित्सकीय सुविधा देने के निर्देश दिए गए थे। जेल प्रशासन ने स्वास्थ्य बिगड़ने पर उसे तुरंत जिला अस्पताल में शिफ्ट किया।
अस्पताल सूत्रों के अनुसार, जच्चा और बच्चा दोनों की स्थिति वर्तमान में स्थिर है। हालांकि, अस्पताल के वार्ड में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। महिला पुलिस बल की तैनाती के बीच मोनिका का इलाज और देखभाल की जा रही है। यह मामला मानवीय संवेदनाओं और कानून की सख्ती के बीच जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है।
Voices from the Ground / Official Statements
“मानवीय आधार पर जेल मैनुअल के अनुसार महिला कैदी को प्रसव के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। सुरक्षा और चिकित्सा के बीच मंगलवार को प्रसव सफल रहा। वर्तमान में जेल वार्ड के भीतर ही उनकी निगरानी की जा रही है।” — जेल अधीक्षक, केंद्रीय जेल दुर्ग

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