- हैरान करने वाला इत्तेफाक: तखतगढ़ में एक सहेली के निधन की सूचना मिलते ही 5 घंटे के भीतर दूसरी सहेली की भी मौत हो गई।
- अंतिम सफर: रविवार को पूरे गांव की मौजूदगी में दोनों का अंतिम संस्कार एक ही चिता पर किया गया।
- इलाके में चर्चा: इस घटना ने पूरे पाली जिले को झकझोर दिया है, लोग इसे सच्ची दोस्ती का ‘अल्टीमेट’ उदाहरण मान रहे हैं।
Shock of Friend’s Death , तखतगढ़ (पाली) — राजस्थान के पाली जिले से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने मेडिकल साइंस और जज्बातों के बीच की लकीर धुंधली कर दी। तखतगढ़ कस्बे में सालों पुरानी दो सहेलियों ने साबित कर दिया कि उनकी ‘फील्डिंग’ जिंदगी के बाद भी साथ नहीं टूटेगी। रविवार को एक सहेली की प्राकृतिक मौत हुई, लेकिन इसका सदमा दूसरी सहेली का दिल बर्दाश्त नहीं कर सका। महज 5 घंटे के भीतर दूसरी सहेली ने भी दम तोड़ दिया।
मैदान से श्मशान तक: 5 घंटे का वो ‘क्रिटिकल’ टाइम
यह कोई फिल्मी कहानी नहीं, बल्कि तखतगढ़ के श्मशान घाट पर दिखी एक कड़वी सच्चाई है। घटना का पूरा घटनाक्रम किसी को भी भावुक कर देने वाला है।
- पहला झटका: रविवार सुबह एक सहेली का देहांत हुआ, जिससे परिवार और मोहल्ले में शोक की लहर दौड़ गई।
- सदमे का प्रहार: जैसे ही यह खबर दूसरी सहेली तक पहुँची, उसकी तबीयत बिगड़ने लगी। उसने अपने दोस्त के बिना जीने से इनकार कर दिया।
- 5 घंटे का अंतराल: पहली मौत के ठीक 5 घंटे बाद दूसरी सहेली ने भी अंतिम सांस ली।
ग्रामीणों के मुताबिक, दोनों के बीच सालों से ऐसी बॉन्डिंग थी कि वे हर सुख-दुख में साथ रहती थीं। परिजनों ने उनकी इस अटूट दोस्ती का सम्मान करते हुए निर्णय लिया कि उनका अंतिम सफर भी साथ ही होगा।
“हमने ऐसी दोस्ती पहले कभी नहीं देखी। एक की मौत का समाचार मिलते ही दूसरी सहेली का चले जाना यह बताता है कि उनका रिश्ता कितना गहरा था। गांव वालों ने नम आंखों से दोनों को एक ही चिता पर विदा किया।”
— स्थानीय निवासी, तखतगढ़

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