नारायणपुर (छत्तीसगढ़): बस्तर के घने जंगलों और दुर्गम रास्तों के बीच तैनात सुरक्षाबलों ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वे न केवल सीमाओं और आंतरिक सुरक्षा के रक्षक हैं, बल्कि संकट के समय आम जनता के सबसे बड़े सहारा भी हैं। छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले से एक ऐसा वीडियो सामने आया है, जिसे देखकर हर कोई इन जवानों के जज्बे को सलाम कर रहा है।
कंधों पर ‘कांवड़’ बनाकर निकाला रास्ता
नारायणपुर के एक सुदूर वनांचल गांव में एक गर्भवती महिला की स्थिति अचानक बिगड़ गई। प्रसव पीड़ा से तड़पती महिला को तुरंत अस्पताल पहुँचाना अनिवार्य था, लेकिन नक्सल प्रभावित क्षेत्र और उबड़-खाबड़ रास्तों के कारण एम्बुलेंस का गांव तक पहुँचना असंभव था।
ऐसे में ITBP (भारत-तिब्बत सीमा पुलिस) की 53वीं बटालियन के जवानों और नारायणपुर पुलिस ने मोर्चा संभाला। जवानों ने लकड़ी और कपड़ों की मदद से एक अस्थायी स्ट्रेचर (कांवड़) तैयार किया और महिला को उस पर लिटाकर ऊंचे-नीचे पहाड़ी रास्तों, नदी-नालों और घने जंगलों के बीच करीब 5 किलोमीटर तक पैदल सफर तय किया।
साहसिक रेस्क्यू का वीडियो वायरल
सोशल मीडिया पर इस रेस्क्यू का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें देखा जा सकता है कि:
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जवान चिलचिलाती धूप और पथरीले रास्तों की परवाह किए बिना दौड़ते हुए मुख्य मार्ग तक पहुँच रहे हैं।
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सुरक्षा के लिहाज से हथियारों से लैस साथी जवान चारों ओर घेरा बनाकर चल रहे हैं।
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मुख्य सड़क पर पहुँचने के बाद महिला को तुरंत सरकारी एम्बुलेंस के जरिए नारायणपुर जिला अस्पताल पहुँचाया गया।
डॉक्टरों ने कहा- ‘समय पर आना रहा जीवन रक्षक’
जिला अस्पताल के डॉक्टरों के अनुसार, महिला की स्थिति नाजुक थी। अगर जवानों ने उसे समय पर अस्पताल नहीं पहुँचाया होता, तो जच्चा और बच्चा दोनों की जान को खतरा हो सकता था। फिलहाल महिला और नवजात सुरक्षित बताए जा रहे हैं।

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