CG News : धमतरी। छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले से एक बेहद भावुक और दर्दनाक मामला सामने आया है। नगरी तहसील के ग्राम देवपुर निवासी शशिकांत भरत ने पिछले 10 वर्षों से बिस्तर पर पड़े रहने की मजबूरी और लगातार हो रही शारीरिक पीड़ा से तंग आकर राज्य सरकार से इच्छा मृत्यु (Mercy Death) की अनुमति देने की गुहार लगाई है। उनका एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें उन्होंने अपनी पीड़ा बयां करते हुए सरकार और प्रशासन से न्याय की अपील की है।
वीडियो में बयां किया अपना दर्द
शशिकांत भरत ने एक भावनात्मक वीडियो संदेश जारी कर विधायक अंबिका मरकाम, धमतरी कलेक्टर अविनाश मिश्रा और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को संबोधित करते हुए कहा कि वह पिछले एक दशक से बिस्तर पर हैं और असहनीय शारीरिक व मानसिक पीड़ा झेल रहे हैं।
उन्होंने कहा कि यदि उनके हाथ-पैर थोड़ा भी काम करते, तो वह वर्षों पहले अपनी जान दे चुके होते। उनके अनुसार, वह पूरी तरह दूसरों पर निर्भर हैं और रोजमर्रा की जरूरतों के लिए भी परिवार की सहायता लेनी पड़ती है।
10 वर्षों से बिस्तर पर हैं शशिकांत
शशिकांत का कहना है कि एक घटना के बाद उनकी जिंदगी पूरी तरह बदल गई। तब से वह सामान्य जीवन नहीं जी पा रहे हैं और लगातार बिस्तर पर रहने को मजबूर हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जिस घटना ने उन्हें इस स्थिति में पहुंचाया, उसके लिए जिम्मेदार लोग आज भी सामान्य जीवन जी रहे हैं, जबकि वह वर्षों से न्याय और राहत की उम्मीद लगाए बैठे हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि लंबे समय से इलाज और आर्थिक परेशानियों के कारण उनका परिवार भी कठिन दौर से गुजर रहा है।
सरकार और प्रशासन से लगाई मदद की अपील
अपने निवेदन में शशिकांत ने केवल इच्छा मृत्यु की अनुमति ही नहीं, बल्कि अपनी स्थिति पर गंभीरता से विचार करने की भी अपील की है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार उनकी चिकित्सा, पुनर्वास या अन्य किसी प्रकार से मदद कर सकती है तो उस पर भी विचार किया जाए।
उनका कहना है कि लगातार दर्द और बेबसी के बीच जीवन बिताना बेहद कठिन हो गया है और इसी कारण उन्होंने यह भावनात्मक गुहार लगाई है।
वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल
शशिकांत का वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। बड़ी संख्या में लोग उनकी स्थिति पर संवेदना जता रहे हैं और प्रशासन से मामले में मानवीय आधार पर हस्तक्षेप करने की मांग कर रहे हैं।
हालांकि, इस मामले में जिला प्रशासन या राज्य सरकार की ओर से समाचार लिखे जाने तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
भारत में सक्रिय इच्छा मृत्यु की अनुमति नहीं है। हालांकि, सर्वोच्च न्यायालय ने कुछ विशेष परिस्थितियों में निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत निष्क्रिय इच्छा मृत्यु की अनुमति दी है। ऐसे मामलों में न्यायालय द्वारा तय दिशा-निर्देशों और चिकित्सकीय प्रक्रिया का पालन आवश्यक होता है।

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