एम्स और मेकाहारा में शिनाख्त की बड़ी चुनौती
रायपुर संभाग के प्रमुख चिकित्सा संस्थानों— एम्स (AIIMS), पंडरी जिला अस्पताल और मेकाहारा (आंबेडकर अस्पताल) में लावारिस लाशों के पहुंचने का सिलसिला थम नहीं रहा है। संस्थान के संचालक सैय्यद जमीर अली ने बताया कि वर्ष 2013 से अब तक लगभग 4,000 से अधिक अज्ञात शव बरामद किए जा चुके हैं। पुलिस और सामाजिक संस्थाएं मिलकर इन शवों का कफन-दफन तो कर देती हैं, लेकिन पहचान का संकट बरकरार है।
अस्पताल प्रशासन के मुताबिक, इन अज्ञात शवों में से अधिकांश सड़क हादसों, लाचारी या लावारिस हालत में बीमारी के कारण दम तोड़ने वाले लोग होते हैं। पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज आंकड़ों और वास्तविक बरामदगी के बीच का अंतर भी चिंताजनक है, क्योंकि शिनाख्त की दर 1 प्रतिशत से भी कम है।
“रायपुर संभाग के एम्स, पंडरी और आंबेडकर अस्पताल में आने वाली हर अज्ञात लाश का कफन-दफन हम करते हैं। दुखद यह है कि हजारों में से सिर्फ 8 लोग अपने परिजनों को ढूंढते हुए यहां तक आए। बाकी हजारों लोग गुमनामी में ही मिट्टी में मिल गए।”

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