CG High Court Decision : बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि किसी सरकारी कर्मचारी की मृत्यु के बाद उसके आश्रित को अनुकंपा नियुक्ति देने का फैसला उस समय लागू नीति के अनुसार किया जाएगा, जब कर्मचारी की मृत्यु हुई थी।
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि सरकार द्वारा बाद में बनाई गई या संशोधित की गई नीति को पुराने मामलों में लागू नहीं किया जा सकता। ऐसा तभी संभव है, जब नई नीति में स्पष्ट रूप से उसे पूर्व प्रभाव (रेट्रोस्पेक्टिव इफेक्ट) से लागू करने का उल्लेख किया गया हो।
पुराने मामलों पर नई नीति लागू करने से किया इनकार
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि अनुकंपा नियुक्ति कोई सामान्य भर्ती प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह कर्मचारी की असामयिक मृत्यु के बाद उसके परिवार को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने का एक माध्यम है। इसलिए इसके लिए पात्रता और नियम वही होंगे, जो कर्मचारी की मृत्यु के समय प्रभावी थे।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी आश्रित के अधिकारों का निर्धारण बाद में बदले गए नियमों के आधार पर नहीं किया जा सकता। यदि कर्मचारी की मृत्यु के समय कोई नीति लागू थी, तो उसी नीति के अनुसार आवेदन और पात्रता पर विचार किया जाना चाहिए।
आश्रितों को राहत देने वाला फैसला
हाईकोर्ट के इस फैसले को अनुकंपा नियुक्ति के लंबित मामलों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कई मामलों में सरकारी विभागों द्वारा नई नीतियों या संशोधित नियमों के आधार पर पुराने आवेदनों पर निर्णय लिया जाता था। अब कोर्ट के इस आदेश से ऐसे मामलों में स्पष्टता आने की उम्मीद है।
अदालत ने कहा कि प्रशासनिक नीतियों में बदलाव का असर उन मामलों पर नहीं डाला जा सकता, जिनमें अधिकार पहले ही उत्पन्न हो चुके हैं।
सरकार को नियमों का पालन करने के निर्देश
हाईकोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि अनुकंपा नियुक्ति के मामलों में निर्णय लेते समय नीति की प्रभावी तिथि और कर्मचारी की मृत्यु की तारीख को ध्यान में रखा जाए।
कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी कहा कि नियमों में बदलाव सरकार का अधिकार है, लेकिन नए नियमों को पुराने मामलों में लागू करने के लिए स्पष्ट कानूनी प्रावधान होना जरूरी है।
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के इस फैसले से सरकारी कर्मचारियों के परिवारों को राहत मिलने की संभावना है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह निर्णय भविष्य में अनुकंपा नियुक्ति से जुड़े विवादों के समाधान में मार्गदर्शक साबित हो सकता है।

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