CG Census News : रायपुर। छत्तीसगढ़ में जनगणना के दूसरे चरण की तैयारियां तेज हो गई हैं। राज्य में पहली बार डिजिटल तकनीक के जरिए जनगणना प्रक्रिया को परखा जाएगा। इसके तहत प्रदेश के 38 चयनित गांवों में 6 जुलाई से प्री-टेस्ट जनगणना शुरू होगी, जो 18 जुलाई तक चलेगी। इस दौरान जनगणना की तकनीकी व्यवस्था, डिजिटल डेटा संग्रहण, मोबाइल एप्लीकेशन और फील्ड सर्वे की पूरी प्रक्रिया का परीक्षण किया जाएगा। इसके बाद 19 और 20 जुलाई को पुनरीक्षण (रिविजनल) चरण आयोजित होगा, जिसमें एकत्रित जानकारी का सत्यापन किया जाएगा।
6 जुलाई से शुरू होगा प्री-टेस्ट अभियान
जनगणना विभाग के अनुसार, प्री-टेस्ट का उद्देश्य वास्तविक जनगणना से पहले पूरी व्यवस्था की कार्यक्षमता की जांच करना है। चयनित 38 गांवों में फील्ड कर्मचारी घर-घर पहुंचकर डिजिटल माध्यम से जानकारी जुटाएंगे। इस अभ्यास के जरिए यह सुनिश्चित किया जाएगा कि मुख्य जनगणना के दौरान किसी प्रकार की तकनीकी या प्रशासनिक समस्या सामने न आए।
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अधिकारियों का कहना है कि यह प्रक्रिया केवल अभ्यास के लिए होगी और इसमें एकत्रित आंकड़ों का उपयोग अंतिम जनगणना के आधिकारिक डेटा में नहीं किया जाएगा।
5 जुलाई तक कर सकते हैं स्व-गणना
प्री-टेस्ट शुरू होने से पहले संबंधित गांवों के नागरिकों को 5 जुलाई तक स्व-गणना (Self Enumeration) का अवसर दिया गया है। इच्छुक लोग निर्धारित डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से स्वयं अपनी जानकारी दर्ज कर सकते हैं।
हालांकि विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह केवल परीक्षण प्रक्रिया का हिस्सा है। मुख्य जनगणना शुरू होने पर इन्हीं गांवों में जनगणना टीम दोबारा पहुंचेगी और सभी जानकारियां नए सिरे से एकत्रित की जाएंगी।
मोबाइल ऐप और डिजिटल डेटा एंट्री पर रहेगा फोकस
इस बार जनगणना प्रक्रिया में डिजिटल तकनीक को प्राथमिकता दी जा रही है। फील्ड कर्मचारी मोबाइल एप्लीकेशन के माध्यम से घर-घर जाकर जानकारी दर्ज करेंगे। इसके साथ ही ऑनलाइन डेटा एंट्री, तकनीकी प्लेटफॉर्म की क्षमता, नेटवर्क की उपलब्धता और डिजिटल रिकॉर्डिंग की सटीकता का भी परीक्षण किया जाएगा।
इस व्यवस्था का उद्देश्य कागजी प्रक्रिया को कम करना, आंकड़ों की शुद्धता बढ़ाना और जनगणना को अधिक तेज, पारदर्शी तथा त्रुटिरहित बनाना है।
फील्ड कर्मचारियों की कार्यप्रणाली भी होगी परखी
प्री-टेस्ट के दौरान केवल तकनीकी प्रणाली ही नहीं, बल्कि फील्ड कर्मचारियों की कार्यशैली, प्रशिक्षण की प्रभावशीलता और डेटा संग्रहण की गुणवत्ता का भी मूल्यांकन किया जाएगा। इससे यह पता लगाया जाएगा कि मुख्य जनगणना के दौरान किन क्षेत्रों में सुधार की आवश्यकता है।
विशेषज्ञ टीम पूरे अभियान की निगरानी करेगी और प्राप्त अनुभवों के आधार पर आवश्यक बदलाव किए जाएंगे।
अधिकारियों के अनुसार, प्री-टेस्ट जनगणना का उद्देश्य केवल आंकड़े जुटाना नहीं, बल्कि पूरे डिजिटल सिस्टम की विश्वसनीयता और दक्षता का परीक्षण करना है। यदि इस अभ्यास के दौरान किसी प्रकार की तकनीकी या प्रशासनिक कमी सामने आती है, तो उसे मुख्य जनगणना शुरू होने से पहले दूर कर लिया जाएगा।
राज्य सरकार और जनगणना विभाग का मानना है कि डिजिटल तकनीक के उपयोग से भविष्य की जनगणना अधिक सटीक, पारदर्शी और समयबद्ध होगी। इससे न केवल आंकड़ों की गुणवत्ता बेहतर होगी, बल्कि सरकारी योजनाओं के निर्माण और विकास कार्यों के लिए भी अधिक विश्वसनीय जानकारी उपलब्ध हो सकेगी।

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