CG Assembly : रायपुर, 19 जुलाई। छत्तीसगढ़ विधानसभा में विधायकों की सक्रियता का रिपोर्ट कार्ड सामने आ गया है। फरवरी 2024 से जुलाई 2026 तक आयोजित आठ सत्रों के दौरान विधायकों ने सरकार से कुल 12,559 प्रश्न पूछे। जारी आंकड़ों से स्पष्ट है कि सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ने विभिन्न जनहित के मुद्दों को जोरदार तरीके से सदन में उठाया।
विशेष बात यह रही कि सत्ता पक्ष के विधायक सवाल पूछने के मामले में सबसे ज्यादा सक्रिय रहे, जबकि विपक्ष ने भी सरकार को घेरने में कोई कसर नहीं छोड़ी और 7,870 प्रश्न पूछे।
सत्ता पक्ष ने पूछे सबसे ज्यादा सवाल
आंकड़ों के मुताबिक भाजपा के कई विधायक लगातार प्रश्न पूछने में शीर्ष स्थान पर रहे। इनमें ग्रामीण विकास, सड़क, बिजली, सिंचाई, शिक्षा, स्वास्थ्य और कानून-व्यवस्था से जुड़े मुद्दे प्रमुख रहे। सत्ता पक्ष के विधायकों ने अपने-अपने क्षेत्रों की समस्याओं को लेकर विभागवार सवाल लगाए और योजनाओं की प्रगति पर जानकारी मांगी।
विधानसभा सचिवालय के सूत्रों के अनुसार कई विधायकों ने एक ही सत्र में दर्जनों प्रश्न लगाए, जिससे उनकी सदन में सक्रिय उपस्थिति भी दर्ज हुई।
विपक्ष ने सरकार को घेरा
विपक्ष की ओर से कांग्रेस विधायकों ने भी आक्रामक रुख अपनाया। उन्होंने बेरोजगारी, किसानों की समस्याएं, कानून-व्यवस्था, खनन, भ्रष्टाचार, स्वास्थ्य सेवाओं और विभिन्न सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर सरकार से तीखे सवाल किए।
7,870 प्रश्नों के जरिए विपक्ष ने यह संदेश देने की कोशिश की कि वह सदन के भीतर सरकार की जवाबदेही तय कराने के लिए लगातार सक्रिय है।
किन मुद्दों पर सबसे ज्यादा प्रश्न?
विधानसभा में पूछे गए प्रश्नों में सबसे ज्यादा संख्या इन विषयों से जुड़ी रही:
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सड़क और पुल निर्माण,
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बिजली आपूर्ति और ट्रांसफार्मर,
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पेयजल और सिंचाई,
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स्कूलों में शिक्षकों की कमी,
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अस्पतालों में डॉक्टरों की नियुक्ति,
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वन अधिकार पट्टे,
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और राजस्व मामलों से जुड़े प्रश्न।
ग्रामीण क्षेत्रों से जुड़े मुद्दों का दबदबा सबसे ज्यादा देखने को मिला।
सक्रिय विधायकों की सूची पर नजर
सूत्रों के मुताबिक भाजपा और कांग्रेस दोनों दलों के कुछ विधायक प्रश्न पूछने के मामले में लगातार शीर्ष पर रहे। हालांकि विधानसभा सचिवालय द्वारा जारी विस्तृत सूची में सभी विधायकों के प्रश्नों की संख्या अलग-अलग दर्ज की गई है। राजनीतिक गलियारों में इसे अगले चुनाव से पहले विधायकों की कार्यशैली का महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।
संसदीय कार्यों के जानकारों का कहना है कि प्रश्नकाल किसी भी विधायक की सक्रियता का महत्वपूर्ण पैमाना माना जाता है। इससे यह पता चलता है कि जनप्रतिनिधि अपने क्षेत्र की समस्याओं को कितनी गंभीरता से सदन तक पहुंचा रहे हैं। अधिक प्रश्न पूछने वाले विधायकों को आमतौर पर क्षेत्रीय मुद्दों पर ज्यादा सजग माना जाता है।

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