बिलासपुर (छत्तीसगढ़)। हाल ही में हुए मेमू लोकल ट्रेन हादसे में रेलवे प्रशासन की गंभीर चूक सामने आई है। रेलवे जांच रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि जिस लोको पायलट के जिम्मे यह ट्रेन थी, वह साइकोलॉजिकल टेस्ट (Psycho Test) में फेल हो चुका था। इसके बावजूद अधिकारियों ने नियमों को दरकिनार कर उसे ट्रेन चलाने की अनुमति दे दी। इस लापरवाही की वजह से हुए हादसे में 11 यात्रियों की जान चली गई।
नियमों की अनदेखी बनी हादसे की वजह
रेलवे के नियमों के अनुसार, किसी भी पैसेंजर ट्रेन को चलाने के लिए लोको पायलट का साइको टेस्ट पास करना अनिवार्य होता है। यह टेस्ट चालक की मानसिक स्थिरता, निर्णय क्षमता और आपात स्थिति में प्रतिक्रिया जांचने के लिए होता है। रिपोर्ट में पाया गया कि संबंधित पायलट टेस्ट में असफल रहा था, लेकिन फिर भी उसे मेमू लोकल ट्रेन चलाने की जिम्मेदारी दे दी गई।
रेलवे अधिकारियों की भूमिका पर उठे सवाल
जांच में यह भी सामने आया कि अफसरों ने उच्च स्तर पर अनुमति देकर नियमों की अनदेखी की। यह निर्णय सीधे सुरक्षा मानकों का उल्लंघन था। रेलवे के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इस मामले में कई अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जा रही है और विभागीय जांच का आदेश दे दिया गया है।
11 यात्रियों की मौत, कई घायल
यह हादसा बिलासपुर रूट पर हुआ था, जब ट्रेन अचानक तेज रफ्तार से कंट्रोल खो बैठी और पटरी से उतर गई। हादसे में 11 यात्रियों की मौत और कई घायल हो गए थे। शुरुआती जांच में तकनीकी खामी की बात सामने आई थी, लेकिन अब पता चला है कि मानव लापरवाही इस त्रासदी की मुख्य वजह थी।
रेलवे की सफाई और आगामी कदम
रेलवे प्रशासन ने इस पूरे मामले को गंभीरता से लिया है। अफसरों की भूमिका की जांच सुरक्षा निदेशालय (Safety Directorate) कर रहा है। रेलवे ने अब यह निर्देश जारी किया है कि साइको टेस्ट पास किए बिना किसी भी लोको पायलट को ट्रेन संचालन की अनुमति नहीं दी जाएगी। साथ ही, टेस्ट प्रक्रिया को डिजिटल और ट्रांसपेरेंट बनाने पर भी जोर दिया जा रहा है।
विशेषज्ञों ने उठाए सवाल, सुरक्षा पर जोर
रेलवे से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला सिस्टम की खामी को उजागर करता है। साइको टेस्ट का उद्देश्य ही यह सुनिश्चित करना है कि चालक आपात स्थिति में सही निर्णय ले सके। ऐसे में फेल चालक को ट्रेन संचालन की अनुमति देना सीधी लापरवाही है।

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