बिलासपुर, 05 अप्रैल 2026। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने प्रशासनिक अधिकारों की व्याख्या करते हुए एक नजीर पेश करने वाला फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि किसी भी जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) का प्रभार बदलने या उन्हें पदमुक्त करने का वैधानिक अधिकार जिला कलेक्टर के पास नहीं है। अदालत ने इस संबंध में कलेक्टर द्वारा जारी आदेश को अवैध करार देते हुए याचिकाकर्ता की तत्काल बहाली के निर्देश दिए हैं।
क्या था पूरा मामला?
यह मामला शुभा दामोदर मिश्रा से जुड़ा है, जो जनपद पंचायत में मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) के पद पर कार्यरत थीं। संबंधित जिले के कलेक्टर ने एक आदेश जारी कर शुभा मिश्रा से सीईओ का प्रभार छीन लिया था और उनके स्थान पर किसी अन्य अधिकारी को यह जिम्मेदारी सौंप दी थी। कलेक्टर के इस प्रशासनिक फेरबदल को चुनौती देते हुए शुभा मिश्रा ने अधिवक्ता के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।
CG BREAKING : बस्तर-कोरापुट में आधी रात भूकंप से दहशत’ 4.4 तीव्रता के झटकों से घरों से बाहर भागे लोग
कोर्ट की तीखी टिप्पणी: “अधिकार क्षेत्र से बाहर की कार्रवाई”
मामले की सुनवाई न्यायाधीश पार्थ प्रतिम साहू की एकल पीठ में हुई। याचिकाकर्ता के पक्ष को सुनने के बाद कोर्ट ने पाया कि:
-
जनपद पंचायत सीईओ की नियुक्ति और उनके प्रभार संबंधी निर्णय लेने का अधिकार राज्य शासन (पंचायत विभाग) के पास सुरक्षित है।
-
कलेक्टर प्रशासनिक नियंत्रण तो रख सकते हैं, लेकिन वे राज्य सरकार द्वारा नियुक्त राजपत्रित अधिकारी का प्रभार अपनी मर्जी से नहीं बदल सकते।
-
कोर्ट ने माना कि कलेक्टर का आदेश न केवल नियमों के विरुद्ध था, बल्कि उनके अधिकार क्षेत्र (Jurisdiction) से भी बाहर था।
कलेक्टर का आदेश निरस्त, बहाली के निर्देश
न्यायाधीश पार्थ प्रतिम साहू ने अपने फैसले में कलेक्टर के पूर्व आदेश को निरस्त (Quash) कर दिया। कोर्ट ने शासन और जिला प्रशासन को निर्देशित किया है कि शुभा दामोदर मिश्रा को पुनः उनके मूल पद (CEO जनपद पंचायत) पर बहाल किया जाए और उन्हें कार्य करने दिया जाए।

More Stories
CG NEWS : बड़ा फर्जीवाड़ा’ शिक्षकों के नाम पर फर्जी नियुक्ति पत्र जारी, मचा हड़कंप
खराब मौसम ने रोकी CM Say’ की राह’ रायपुर में हेलीकॉप्टर की उड़ान रद्द, कुनकुरी का दौरा टला
CG NEWS : आधुनिकता की अंधी दौड़’ दुर्ग में स्कूली छात्रा का आपत्तिजनक वीडियो वायरल, सोशल मीडिया पर नैतिकता पर छिड़ी बहस