
वायरल वीडियो से मचा सियासी तूफान
सोशल मीडिया पर वीडियो तेजी से फैला। कुछ ही घंटों में मामला नियंत्रण से बाहर दिखा। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने विरोध जताया। आरोप सीधा था—वीडियो फर्जी है, छवि खराब करने की कोशिश है। पुलिस ने तुरंत एक्टिव मोड लिया। डिजिटल ट्रेल खंगाली जा रही है। किसने बनाया? किसने फैलाया? यही अब जांच का केंद्र है। इंस्टाग्राम ID को ब्लॉक कर दिया गया है, जिससे वीडियो फैलाया गया था। एक अधिकारी ने संकेत दिया—“डेटा रिकवरी और IP ट्रैकिंग जारी है।” मामला अब साइबर एंगल से भी देखा जा रहा है।
जांच की दिशा: AI, फेक कंटेंट और डिजिटल अपराध
यह सिर्फ एक वीडियो नहीं। यह डिजिटल युग की नई चुनौती है। AI टूल्स से बने कंटेंट की पहचान करना आसान नहीं होता। यही कारण है कि पुलिस ने साइबर एक्सपर्ट्स को शामिल किया है।
जांच टीम अब इन बिंदुओं पर काम कर रही है:
- वीडियो का सोर्स और एडिटिंग पैटर्न
- सोशल मीडिया शेयरिंग चेन
- संभावित राजनीतिक या व्यक्तिगत मकसद
एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “अगर यह AI जनरेटेड निकला, तो यह गंभीर साइबर अपराध माना जाएगा।”

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