Bengaluru Quarry Accident : बेंगलुरु। कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु से एक दर्दनाक औद्योगिक हादसे की खबर सामने आई है। गुरुवार सुबह बेंगलुरु साउथ तालुक के मादापट्टना क्षेत्र स्थित एक पत्थर की खदान में अचानक विशाल चट्टान खिसककर गिर गई। हादसे के समय कई मजदूर खदान में काम कर रहे थे। भारी चट्टान और मलबे की चपेट में आने से बिहार के रहने वाले सात मजदूरों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि कई अन्य मजदूर गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई।
चट्टान गिरते ही मची चीख-पुकार
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार मजदूर रोज की तरह खदान में पत्थर निकालने का काम कर रहे थे। इसी दौरान अचानक पहाड़ी का एक बड़ा हिस्सा टूटकर नीचे आ गिरा। किसी को संभलने का मौका तक नहीं मिला और कई मजदूर मलबे के नीचे दब गए। हादसे के बाद मौके पर मौजूद लोगों ने तुरंत पुलिस और प्रशासन को सूचना दी।
राहत और बचाव अभियान में जुटी कई एजेंसियां
सूचना मिलते ही पुलिस, अग्निशमन विभाग, आपदा प्रबंधन दल और एंबुलेंस मौके पर पहुंचीं। जेसीबी और अन्य भारी मशीनों की मदद से मलबा हटाने का काम शुरू किया गया। बचाव दल ने कई मजदूरों को बाहर निकालकर नजदीकी अस्पताल पहुंचाया, जहां उनका उपचार जारी है। अधिकारियों ने आशंका जताई है कि मलबे के नीचे कुछ और मजदूर फंसे हो सकते हैं, इसलिए सर्च ऑपरेशन लगातार जारी है।
मृतकों की पहचान बिहार के प्रवासी मजदूरों के रूप में
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि हादसे में जान गंवाने वाले सभी सात मजदूर बिहार के विभिन्न जिलों के निवासी थे और रोजी-रोटी की तलाश में कर्नाटक आए थे। प्रशासन मृतकों की पहचान की पुष्टि करने और उनके परिजनों से संपर्क करने की प्रक्रिया में जुटा हुआ है। घटना की सूचना मिलते ही मृतकों के परिवारों में शोक की लहर दौड़ गई।
हादसे के कारणों की होगी विस्तृत जांच
प्रशासन ने दुर्घटना के कारणों की जांच के आदेश दे दिए हैं। शुरुआती अनुमान है कि चट्टान की संरचना कमजोर होने या सुरक्षा मानकों की अनदेखी के कारण यह हादसा हुआ हो सकता है। जांच टीम यह भी पता लगाएगी कि खदान में सुरक्षा नियमों का पालन किया जा रहा था या नहीं। यदि किसी प्रकार की लापरवाही सामने आती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
इस दर्दनाक हादसे के बाद एक बार फिर खनन क्षेत्रों में मजदूरों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि खदानों में नियमित भू-वैज्ञानिक निरीक्षण, सुरक्षा ऑडिट और आधुनिक उपकरणों का उपयोग अनिवार्य होना चाहिए, ताकि इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके। फिलहाल प्रशासन राहत और बचाव कार्य में जुटा है, जबकि पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल बना हुआ है।

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