कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के प्रथम चरण के मतदान से ठीक पहले राज्य का सियासी पारा सातवें आसमान पर है। इस बीच, चुनावी रणनीतिकार संस्था आई-पैक (I-PAC) के कामकाज को अस्थाई रूप से बंद करने और कर्मचारियों को छुट्टी पर भेजने की खबरों ने राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है। यह विवाद तब शुरू हुआ जब सोशल मीडिया और कुछ हलकों में दावा किया गया कि संस्था ने बंगाल में अपना ऑपरेशन रोक दिया है। हालांकि, सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने इन खबरों को पूरी तरह निराधार और भ्रामक बताते हुए इसे विपक्ष की एक ‘गंदी साजिश’ करार दिया है। टीएमसी का कहना है कि चुनाव से ठीक पहले मनोबल गिराने के लिए ऐसी अफवाहें फैलाई जा रही हैं।
ED की कार्रवाई और गिरफ्तारी से उपजा विवाद
आई-पैक को लेकर यह चर्चा तब तेज हुई जब हाल ही में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने संस्था के को-फाउंडर विनेश चंदेल को कथित कोयला घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार किया। 13 अप्रैल 2026 को हुई इस गिरफ्तारी के बाद से ही आई-पैक के भविष्य को लेकर अटकलें लगाई जा रही थीं। विपक्ष का दावा है कि केंद्रीय एजेंसियों के बढ़ते दबाव के कारण संस्था ने अपने हाथ खींच लिए हैं।
आई-पैक और टीएमसी का क्या है पक्ष?
तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता डेरेक ओ’ब्रायन और अभिषेक बनर्जी ने इन दावों का खंडन करते हुए इसे ‘इलेक्टोरल सेबोटाज’ (चुनावी तोड़फोड़) बताया है। पार्टी के अनुसार:
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आई-पैक का कामकाज पूरी तरह सुचारू है और टीम जमीन पर मजबूती से डटी हुई है।
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कर्मचारियों को छुट्टी पर भेजने की बात पूरी तरह मनगढ़ंत है।
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केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल चुनावी रणनीतियों और दस्तावेजों को हासिल करने के लिए किया जा रहा है।
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पार्टी ने स्पष्ट किया कि विनेश चंदेल की गिरफ्तारी का उद्देश्य चुनाव के दौरान डर का माहौल पैदा करना है।
चुनावी रणनीतियों पर पड़ने वाला प्रभाव
पश्चिम बंगाल में आई-पैक साल 2021 से टीएमसी के लिए चुनावी प्रबंधन का काम देख रही है। डेटा विश्लेषण से लेकर ‘दीदीर दूत’ और ‘जनसंयोग यात्रा’ जैसे अभियानों के पीछे इसी संस्था का दिमाग माना जाता है। प्रथम चरण के मतदान (23 अप्रैल) से चंद दिन पहले ऐसी खबरों का आना मतदाताओं के मनोविज्ञान को प्रभावित कर सकता है, जिसे भांपते हुए टीएमसी ने तुरंत जवाबी हमला बोला है।
बीजेपी का पलटवार
वहीं, भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। बीजेपी नेताओं का कहना है कि भ्रष्टाचार के मामलों में एजेंसियां अपना काम कर रही हैं और इसका चुनाव से कोई लेना-देना नहीं है। बीजेपी के अनुसार, यदि आई-पैक के वित्तीय लेन-देन में गड़बड़ी पाई गई है, तो कानून अपना काम करेगा।

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