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महिला आरक्षण के पदों पर पुरुषों की नियुक्ति गलत, छत्तीसगढ़ High Court’ का बड़ा फैसला

High Court’ रायपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने शिक्षक भर्ती से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में महिला आरक्षण को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि महिलाओं के लिए आरक्षित पदों को बिना किसी वैधानिक प्रावधान के पुरुष अभ्यर्थियों से भरना नियमों के अनुरूप नहीं है। हाईकोर्ट ने रायपुर नगर निगम की वर्ष 2013-14 की सहायक शिक्षक भर्ती में ओबीसी महिला वर्ग के 12 पदों पर पुरुष अभ्यर्थियों की नियुक्ति को गैरकानूनी माना है।

204 सहायक शिक्षकों की भर्ती से जुड़ा मामला

यह पूरा मामला रायपुर नगर निगम द्वारा सहायक शिक्षक यानी शिक्षाकर्मी वर्ग-3 (विज्ञान) के कुल 204 पदों पर की गई भर्ती से जुड़ा है। भर्ती प्रक्रिया के दौरान ओबीसी महिला वर्ग के लिए निर्धारित 12 पदों पर पुरुष अभ्यर्थियों की नियुक्ति की गई थी।

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इस नियुक्ति को लेकर मामला हाईकोर्ट पहुंचा, जहां याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने महिला आरक्षण से जुड़े प्रावधानों की समीक्षा की।

महिला आरक्षित पदों पर पुरुषों की नियुक्ति को माना गलत

जस्टिस राकेश मोहन पांडेय की अदालत ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि महिलाओं के लिए निर्धारित आरक्षित पदों को केवल इस आधार पर पुरुष अभ्यर्थियों से नहीं भरा जा सकता कि संबंधित पदों पर योग्य महिला उम्मीदवार उपलब्ध नहीं हैं। इसके लिए संबंधित नियमों में स्पष्ट वैधानिक प्रावधान होना आवश्यक है।

कोर्ट ने रायपुर नगर निगम की भर्ती में ओबीसी महिला वर्ग के 12 पदों पर पुरुष अभ्यर्थियों की नियुक्ति को गैरकानूनी माना है।

आरक्षण के नियमों का पालन जरूरी

हाईकोर्ट के इस फैसले से यह महत्वपूर्ण बात सामने आई है कि भर्ती प्रक्रिया में आरक्षित वर्ग के पदों को भरते समय संबंधित नियमों और वैधानिक प्रावधानों का पालन करना अनिवार्य है। महिलाओं के लिए निर्धारित पदों को बिना स्पष्ट कानूनी आधार के दूसरे वर्ग के अभ्यर्थियों से भरना नियमों के विपरीत माना जाएगा।

पुराने भर्ती मामले में आया फैसला

यह मामला करीब एक दशक पुरानी भर्ती प्रक्रिया से संबंधित है। रायपुर नगर निगम ने वर्ष 2013-14 में सहायक शिक्षक, शिक्षाकर्मी वर्ग-3 (विज्ञान) के 204 पदों पर भर्ती की थी। इसी भर्ती में ओबीसी महिला वर्ग के 12 पदों को लेकर विवाद सामने आया था।

मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने महिला आरक्षण से संबंधित महत्वपूर्ण कानूनी स्थिति स्पष्ट की है। इस फैसले को सरकारी भर्ती में महिला आरक्षण के प्रावधानों के लिहाज से अहम माना जा रहा है।

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