Chhattisgarh Police Recruitment Result 2025 : रायपुर। छत्तीसगढ़ में हाल ही में घोषित पुलिस भर्ती परिणामों को लेकर विरोध तेज हो गया है। अभ्यर्थियों ने चयन प्रक्रिया में अनियमितताओं और पारदर्शिता की कमी का आरोप लगाते हुए गुरुवार को बिलासपुर हाईकोर्ट का रुख किया। प्रदेशभर से सैकड़ों अभ्यर्थी वहां पहुंचे और सामूहिक रूप से याचिकाएं दायर की।
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अभ्यर्थियों की मुख्य शिकायतें
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मेरिट सूची में असंगतियां:
अभ्यर्थियों का आरोप है कि समान कैटेगिरी में कम अंक पाने वाले उम्मीदवारों को चयनित किया गया, जबकि अधिक अंक पाने वाले कई अभ्यर्थियों को बाहर कर दिया गया। यह स्थिति कई जिलों में देखने को मिली है और चयन प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर रही है। -
एक ही उम्मीदवार का दो कैटेगिरी में नाम:
कुछ अभ्यर्थियों के नाम सामान्य वर्ग और OBC दोनों की प्रतीक्षा सूची में शामिल पाए गए। यह नियमों के खिलाफ है और भर्ती प्रक्रिया की गंभीर तकनीकी और प्रशासनिक त्रुटि को दर्शाता है। -
तकनीकी और प्रशासनिक लापरवाही:
अभ्यर्थियों का कहना है कि मेरिट सूची तैयार करने में तकनीकी और प्रशासनिक लापरवाही हुई है, जिससे योग्य उम्मीदवारों के साथ अन्याय हुआ है।
अभ्यर्थियों की मांग
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अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की और अनुरोध किया कि जांच पूरी होने तक नियुक्ति आदेश जारी न किए जाएं।
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उनका कहना है कि यदि नियुक्ति जारी कर दी गई तो योग्य उम्मीदवारों के भविष्य पर गंभीर असर पड़ेगा, और बाद में सुधार या पुनर्विचार करना बेहद कठिन होगा।
अभ्यर्थियों का आक्रोश
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अभ्यर्थियों ने बताया कि उन्होंने महीनों से भर्ती की तैयारी की थी, जिसमें फिजिकल, लिखित परीक्षा और दस्तावेज़ सत्यापन शामिल था।
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परिणामों में असंगतियां सामने आने के कारण वे ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।
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प्रदेशभर से आए सैकड़ों अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर न्यायिक जांच की मांग की।
हाईकोर्ट में सुनवाई और संभावित असर
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इस मामले की हाईकोर्ट में सुनवाई की तैयारी हो रही है।
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न्यायालय महत्वपूर्ण निर्देश दे सकता है, जिससे भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और न्याय सुनिश्चित हो सके।
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राज्य पुलिस मुख्यालय और भर्ती बोर्ड पर भी दबाव बढ़ सकता है और उन्हें स्पष्टीकरण देना पड़ सकता है।
भर्ती प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल
यह विवाद यह दर्शाता है कि छत्तीसगढ़ पुलिस भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और तकनीकी मानकों को लेकर गंभीर समस्याएं हैं। कई जिलों में हुई गलतियों और असंगतियों ने अभ्यर्थियों का विश्वास तोड़ा है और उन्हें न्याय की आवश्यकता महसूस हो रही है।
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यदि न्यायालय ने भर्ती प्रक्रिया की जांच के आदेश दिए, तो यह भविष्य में भर्ती प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी बनाने में मदद करेगा।
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अभ्यर्थियों की मांग है कि सभी गलतियों को सुधारने और योग्य उम्मीदवारों को न्याय दिलाने के बाद ही अंतिम नियुक्ति आदेश जारी किया जाए।

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