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February 22, 2026

वेब न्यूज़ पोर्टल संघर्ष के स्वर

संघर्ष ही सफलता की पहली सीढ़ी है।

नक्सल मोर्चे पर बड़ी हलचल, पहली बार हथियार छोड़ने को तैयार MMC जोन – तीन राज्यों से 15 फरवरी 2026 तक युद्धविराम की मांग

जगदलपुर। नक्सल मोर्चे पर लगातार तेज़ होती कार्रवाई के बीच एक बड़ा और ऐतिहासिक घटनाक्रम सामने आया है। कुख्यात नक्सली कमांडर माडवी हिडमा के मारे जाने के बाद माओवादी संगठन बिखरता हुआ नजर आ रहा है। इसी बीच पहली बार MMC जोन (महाराष्ट्र-मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ स्पेशल जोनल कमेटी) ने हथियार छोड़ने की इच्छा जताते हुए तीनों राज्यों की सरकारों को पत्र भेजा है। संगठन ने 15 फरवरी 2026 तक युद्धविराम की अवधि देने का आग्रह किया है।

हिडमा के मारे जाने से नक्सल संगठन में मची खलबली

केंद्र सरकार के नक्सल उन्मूलन अभियान को बड़ी सफलता मिलती दिख रही है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लक्ष्य निर्धारित किया था कि 31 मार्च 2026 तक देश को नक्सलवाद से पूरी तरह मुक्त किया जाएगा। हालिया घटनाक्रम इसी दिशा में महत्वपूर्ण संकेत देता है।

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कुछ दिन पहले सुरक्षा बलों ने एक विशेष ऑपरेशन में कुख्यात नक्सली कमांडर माडवी हिडमा को मुठभेड़ में ढेर कर दिया। हिडमा के साथ उसकी पत्नी राजे और उसके गार्ड समेत कुल 6 नक्सली मारे गए। इस बड़ी कार्रवाई के बाद नक्सल संगठनों में हड़कंप मचा हुआ है। हिडमा को माओवादी संगठन का सबसे खतरनाक और रणनीतिक कमांडर माना जाता था।

MMC जोन ने भेजा पत्र, हथियार छोड़ने की इच्छा जताई

इसी बीच माओवादी संगठन MMC जोन ने पहली बार शांति की ओर कदम बढ़ाते हुए तीन राज्यों के मुख्यमंत्रियों—महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़—को पत्र जारी किया है। संगठन के प्रवक्ता अनंत की ओर से जारी इस पत्र में कहा गया है कि वे हथियार छोड़कर मुख्यधारा में शामिल होना चाहते हैं, लेकिन इसके लिए सरकारों को 15 फरवरी 2026 तक युद्धविराम का मौका देना होगा।

पत्र में यह भी अपील की गई है कि सुरक्षाबल PLGA सप्ताह के दौरान अपने ऑपरेशन रोकें। प्रवक्ता ने यह भी स्पष्ट किया है कि MMC जोन इस बार PLGA सप्ताह नहीं मनाएगा, जो संकेत देता है कि संगठन अब संघर्ष छोड़ शांतिपूर्ण समाधान की ओर बढ़ रहा है।

नक्सलवाद खत्म होने की दिशा में बड़ा संकेत

विशेषज्ञों का मानना है कि यह नक्सल आंदोलन के इतिहास में एक बड़ा मोड़ है। हिडमा की मौत के बाद नक्सली नेतृत्व कमजोर हो चुका है और लगातार दबाव में आ रहे संगठन अब बातचीत और आत्मसमर्पण की ओर बढ़ रहे हैं।

यदि युद्धविराम और आत्मसमर्पण प्रक्रिया आगे बढ़ती है तो यह छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश के लिए नक्सल उन्मूलन की दिशा में ऐतिहासिक सफलता साबित हो सकती है।

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