RBI Governor Sanjay Malhotra, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने शुक्रवार को कहा कि बैंकों पर अधिग्रहण फाइनेंसिंग (Acquisition Financing) से जुड़ी पाबंदियां हटाने का फैसला देश की रियल इकोनॉमी (Real Economy) को मजबूत करेगा। इस कदम से कंपनियों को नए प्रोजेक्ट्स शुरू करने और निवेश बढ़ाने में मदद मिलेगी।आरबीआई ने पिछले महीने बैंकों को अधिग्रहण सौदों के लिए फंडिंग की अनुमति दी थी और साथ ही IPO में शेयर खरीदने के लिए लोन की सीमा भी बढ़ाई थी। यह निर्णय भारत की बैंकिंग व्यवस्था को और लचीला बनाते हुए अर्थव्यवस्था में पूंजी प्रवाह बढ़ाने के उद्देश्य से लिया गया है।
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अधिग्रहण लोन पर हटे प्रतिबंध, अब कंपनियों को आसानी से मिलेगा फंड
पहले बैंकों पर यह प्रतिबंध था कि वे किसी कंपनी या बिजनेस के अधिग्रहण के लिए लोन नहीं दे सकते थे। अब यह रोक हटा दी गई है।
इस बदलाव से कंपनियां जरूरत पड़ने पर बैंकों से सस्ता व सहज फंडिंग हासिल कर सकती हैं, जिससे नए बिजनेस अधिग्रहण, विलय (Merger & Acquisition) और निवेश प्रोजेक्ट्स को बढ़ावा मिलेगा।
आरबीआई गवर्नर के अनुसार, “इन सुधारों से कंपनियों को अधिक फाइनेंशियल लचीलापन मिलेगा और इससे रोजगार सृजन व विकास दर में तेजी आएगी।”
सुरक्षा और स्थिरता के लिए तय की गई सीमाएं
हालांकि आरबीआई ने बैंकों को नई छूट दी है, लेकिन साथ ही कुछ सुरक्षा मानक (Safety Norms) भी तय किए हैं।
बैंक केवल कुल सौदे की कीमत का 70% तक ही लोन दे सकेंगे और लोन एवं निवेश के बीच एक निश्चित सीमा रखनी होगी।
ये नियम यह सुनिश्चित करते हैं कि बैंकों की वित्तीय स्थिरता (Financial Stability) बनी रहे और जोखिम कम हो।
अर्थव्यवस्था में आएगी नई ऊर्जा
आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय भारत की क्रेडिट ग्रोथ (Credit Growth) को नई ऊंचाई पर ले जाएगा।
इससे निवेश, उत्पादन और रोजगार में वृद्धि होगी, जो देश की GDP ग्रोथ को गति देगी।
आरबीआई का यह कदम विकासोन्मुखी सुधारों की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है, जिससे भारत की स्थिति वैश्विक स्तर पर और मजबूत होगी।

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