Bihar Elections पटना, 04 नवंबर 2025| बिहार विधानसभा चुनाव 2025 का पहले चरण का मतदान कुछ ही दिनों में (6 नवंबर को) होने वाला है, और इस चरण में सत्तारूढ़ जनता दल (यूनाइटेड) – JDU के लिए सबसे बड़ी चुनावी चुनौती सामने है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जदयू ने पहले चरण की 57 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं, लेकिन इनमें से 23 सीटें वह हैं जहाँ पार्टी को 2020 के चुनावों में जीत मिली थी। अब पार्टी के सामने इन जीती हुई सीटों पर अपना कब्ज़ा बनाए रखने की कठिन परीक्षा होगी, क्योंकि कई सीटों पर उसे कड़ा मुकाबला मिल रहा है।
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23 सीटों को ‘बनाए रखने’ का लक्ष्य
पहले चरण में कुल 121 सीटों पर मतदान होना है, लेकिन जदयू ने अपने कोटे की 57 सीटों पर प्रत्याशी उतारे हैं। इन्हीं 57 सीटों में 23 सीटें ऐसी हैं जहाँ 2020 में जदयू प्रत्याशियों ने जीत दर्ज की थी। इन जीती हुई सीटों को बरकरार रखना जदयू की चुनावी रणनीति का केंद्रीय बिंदु है। यदि पार्टी इन सीटों पर फिसली, तो यह सीधे तौर पर गठबंधन (NDA) की मजबूती पर सवाल खड़े करेगा।जदयू को जिन प्रमुख सीटों को फिर से जीतने की चुनौती का सामना करना पड़ रहा है, उनमें कई सीटें ऐसी हैं जिनका ऐतिहासिक महत्व है और जहाँ पार्टी की पकड़ मजबूत मानी जाती थी।
29 सीटों पर कड़ी टक्कर और प्रत्याशी बदलना
यह भी ध्यान देने योग्य है कि जिन 57 सीटों पर जदयू लड़ रही है, उनमें से 29 अन्य सीटें ऐसी हैं जहाँ 2020 में या तो पार्टी दूसरे स्थान पर रही थी या फिर वह सीट गठबंधन के किसी अन्य सहयोगी के खाते में गई थी और अब जदयू वहाँ से चुनाव लड़ रही है। इन 29 सीटों पर उसे मजबूत विपक्षी दलों (महागठबंधन) से कड़ी टक्कर मिल रही है।
खास बात यह है कि कुछ पुरानी सीटों पर जदयू ने अपने वर्तमान विधायकों के टिकट काटकर नए चेहरे उतारे हैं, जिससे आंतरिक असंतोष बढ़ने की आशंका है। वहीं, बेगूसराय के मटिहानी क्षेत्र से पिछली बार लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) से जीते प्रत्याशी के पार्टी में शामिल होने के बाद, जदयू ने मटिहानी को भी अपनी ‘फिर से हासिल करने वाली’ सूची में शामिल किया है।

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