काठमांडू: नेपाल में सोशल मीडिया पर प्रतिबंध और भ्रष्टाचार के खिलाफ भड़के विरोध प्रदर्शनों ने प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की सरकार को हिलाकर रख दिया है। हिंसक प्रदर्शनों और 19 लोगों की मौत के बाद सरकार पर चौतरफा दबाव बढ़ गया है। इसी के चलते, सोमवार को गृह मंत्री रमेश लेखक ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उनके इस्तीफे के बाद, अब कृषि मंत्री रामनाथ अधिकारी और स्वास्थ्य मंत्री ने भी अपना इस्तीफा सौंप दिया है, जिससे ओली सरकार पर गहरा संकट मंडरा रहा है।
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हिंसक विरोध और इस्तीफों का सिलसिला देश में युवाओं का “जेन-जी” आंदोलन सरकार के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर प्रतिबंध और भ्रष्टाचार के विरोध में शुरू हुआ था। ये प्रदर्शन धीरे-धीरे हिंसक होते गए, जिसमें कई लोग घायल हुए और 19 लोगों की मौत हो गई। इन मौतों की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए, गृह मंत्री रमेश लेखक ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने कहा कि इस त्रासदी के बाद वे पद पर बने नहीं रह सकते।
कृषि और स्वास्थ्य मंत्री ने भी छोड़ा पद गृह मंत्री के इस्तीफे के बाद, मंगलवार को कृषि एवं पशुधन विकास मंत्री रामनाथ अधिकारी ने भी अपना पद छोड़ दिया। उन्होंने अपने इस्तीफे में कहा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन नागरिकों का अधिकार है, लेकिन सरकार ने इसे दबाने के लिए बल प्रयोग और हिंसा का रास्ता अपनाया। उन्होंने कहा कि ऐसी सरकार में बने रहना उनकी नैतिकता के खिलाफ है। उनके बाद स्वास्थ्य मंत्री ने भी इस्तीफा दे दिया।
गृह मंत्री के घर आगजनी की खबर वहीं, प्रदर्शनकारियों ने गृह मंत्री के घर पर भी आगजनी और तोड़फोड़ की है, जिससे स्थिति और तनावपूर्ण हो गई है। पुलिस ने हिंसक भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस और पानी की बौछारें चलाईं, लेकिन प्रदर्शनकारी लगातार उग्र हो रहे हैं।
संकट में ओली सरकार मंत्रियों के इस्तीफे के बाद, अब प्रधानमंत्री ओली पर भी पद छोड़ने का दबाव बढ़ गया है। प्रदर्शनकारी लगातार उनके इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन इस्तीफों से ओली सरकार कमजोर हुई है और जल्द ही उसे विश्वास मत का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि, सरकार ने फिलहाल सोशल मीडिया पर प्रतिबंध हटा लिया है और गृह मंत्री का इस्तीफा भी स्वीकार कर लिया है।
भारत-नेपाल सीमा पर अलर्ट नेपाल में भड़की इस हिंसा के बाद भारत-नेपाल सीमा पर भी अलर्ट जारी कर दिया गया है। बिहार और उत्तर प्रदेश से सटे सभी प्रवेश द्वारों पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है, ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके।
नेपाल में यह राजनीतिक उथल-पुथल देश में एक नई राजनीतिक अस्थिरता की ओर इशारा कर रही है, जहां सरकार का भविष्य अब पूरी तरह से प्रदर्शनकारियों और विपक्ष के रुख पर निर्भर करता है।

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