Bhadrapada Amavasya: भाद्रपद माह की अमावस्या तिथि 22 अगस्त को ही शुरू हो चुकी है लेकिन उदयातिथि के अनुसार 23 अगस्त को व्रत, दान और पूजन आदि किया जाएगा। भाद्रपद माह में पड़ने वाली अमावस्या तिथि को बेहद खास माना जाता है क्योंकि इस दौरान 64 योगिनियों की उपासना का भी विधान है। साथ ही पितरों का आशीर्वाद पाने के लिए भी यह अमावस्या बेहद खास होती है। इस दिन पितरों के निमित्त तर्पण के साथ ही दान करना भी शुभ होता है। हालांकि कुछ ऐसे कार्य भी हैं जिन्हें इस दिन करने से बचना चाहिए, इन कार्यों को करने से पितृ देवता रूठ सकते हैं और आपके जीवन में अड़चनें आ सकती हैं।
गलती से भी नए काम की न करें शुरुआत
भाद्रपद अमावस्या का दिन पितृ और ईश्वर की भक्ति के लिए समर्पित माना जाता है। इसलिए अमावस्या तिथि के दिन कभी भी कोई नया काम आपको शुरू नहीं करना चाहिए। नया काम शुरू न करने का एक कारण यह भी है कि इस दिन चंद्रमा की शक्ति क्षीण होती है, ऐसे में अगर आप नया काम शुरू करते हैं तो उसके सफल होने के आसान कम रहते हैं।
तामसिक भोजन का सेवन करना
अमावस्या तिथि के दिन आपको तामसिक भोज्य पदार्थों का सेवन करने से भी बचना चाहिए। इस दिन गलती से भी मांस, मदिरा का सेवन न करें। साथ ही लहसुन-प्याज से भी परहेज करना चाहिए। इन चीजों का सेवन करने से आपका मन भटकता है, पूजा-ध्यान आदि में आपका मन नहीं लगता है। इसके साथ ही अमावस्या के दिन तामसिक भोजन करने से पितृ भी रुठ जाते हैं। इसलिए गलती से भी अमावस्या तिथि पर तामसिक भोजन न खाएं।
इन कार्यों को करना भी गलत
अमावस्या के दिन आपको बाल और नाखुन काटने से भी बचना चाहिए। इसके साथ ही यात्रा करना भी इस दिन शुभ नहीं माना जाता, इस दिन की गई यात्राएं असफल हो सकती हैं। साथ ही यात्राओं के दौरान आपको अन्य परेशानियों का सामना भी करना पड़ सकता है। इस दिन यात्राओं को स्थगित करके आपको धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियां करने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है।

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