रायपुर, छत्तीसगढ़: छत्तीसगढ़ में कार्यरत श्रमिकों के लिए एक महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। विद्युत ठेका श्रमिक संघ छत्तीसगढ़ ने राज्य के श्रम मंत्री, माननीय लखन लाल देवांगन को पत्र लिखकर न्यूनतम वेतन अधिनियम 1948 की धारा -03 (ख) के तहत मजदूरी दरों के तत्काल पुनर्विलोकन और पुनरीक्षण की मांग की है।
संघ के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय द्वारा हस्ताक्षरित पत्र में कहा गया है कि नियमानुसार, राज्य सरकार को हर पाँच साल में श्रमिकों के वेतन का पुनरीक्षण करना अनिवार्य है। छत्तीसगढ़ में अंतिम बार श्रम विभाग द्वारा वर्ष 2017 में न्यूनतम वेतन दरों को अधिसूचित किया गया था। इस हिसाब से, अगला पुनरीक्षण वर्ष 2022 में होना चाहिए था, लेकिन खेदजनक है कि 2017 के बाद से वेतन दरों में कोई संशोधन नहीं किया गया है।
संघ ने इस बात पर चिंता व्यक्त की है कि वेतन दरों में संशोधन न होने के कारण प्रदेश के श्रमिक भारी आर्थिक नुकसान उठा रहे हैं, खासकर इस बढ़ती महंगाई के दौर में उन्हें जीवन-यापन करने में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। पत्र में उदाहरण के तौर पर दिल्ली और झारखंड जैसे राज्यों का भी उल्लेख किया गया है, जहां वेतन का पुनरीक्षण/पुनरीक्षण पहले ही किया जा चुका है।
विद्युत ठेका श्रमिक संघ ने मंत्री महोदय से अनुरोध किया है कि वे छत्तीसगढ़ के मेहनतकश श्रमिकों की कड़ी मेहनत और उनकी वर्तमान आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए, उनके हित में न्यूनतम मजदूरी दरों का जल्द से जल्द पुनर्विलोकन और पुनरीक्षण करवाएं। संघ का मानना है कि इससे राज्य के मेहनतकश श्रमिकों की आर्थिक स्थिति में सुधार होगा और वे इसके लिए सरकार के आभारी रहेंगे। यह मुद्दा लाखों श्रमिकों के जीवन को प्रभावित करता है और उनके उचित पारिश्रमिक के अधिकार को सुनिश्चित करने के लिए तत्काल कार्रवाई की आवश्यकता है।



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