रायपुर।
जिला एवं सत्र न्यायालय परिसर स्थित सभागार में शुक्रवार, 9 अक्टूबर 2026 को रायपुर जिला अधिवक्ता संघ की प्रथम आम सभा का आयोजन किया गया। लोकतांत्रिक मूल्यों और पारदर्शिता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयोजित इस बैठक की शुरुआत अध्यक्षीय उद्बोधन के साथ हुई। सभा में न्यायालय परिसर की बुनियादी आवश्यकताओं, अधिवक्ता कल्याण, बीमा, ट्रिब्यूनल स्थापना तथा बहुप्रतीक्षित अधिवक्ता सुरक्षा कानून जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर दिनभर गहन मंथन हुआ और कई निर्णायक सुझाव सामने आए।
बुनियादी सुविधाओं और राजधानी स्तरीय कार्यालय का संकल्प
अध्यक्षीय उद्बोधन में संघ के नवनिर्वाचित पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि रायपुर अधिवक्ता संघ को प्रदेश की राजधानी के अनुरूप सर्वसुविधायुक्त और आधुनिक बनाया जाएगा। बैठक में प्रमुख प्राथमिकताओं को रेखांकित करते हुए न्यायालय परिसर में:
* व्यवस्थित पार्किंग व्यवस्था,
* हाई-स्पीड फ्री वाई-फाई सुविधा,
* शुद्ध एवं शीतल पेयजल की समुचित आपूर्ति,
* पूरी तरह वातानुकूलित (AC) बैठक व्यवस्था तथा
* सुसज्जित राजधानी स्तरीय आधुनिक बार रूम कार्यालय के विस्तार पर कार्ययोजना प्रस्तुत की गई।
इसके अतिरिक्त, आय-व्यय के लेखाजोखा के पूर्ण ऑडिट और पारदर्शिता की व्यवस्था की गई।
अधिवक्ता सुरक्षा कानून और ट्रिब्यूनल की स्थापना पर आंदोलन की हुंकार
अधिवक्ताओं के हितों और सुरक्षा को लेकर सदन में वरिष्ठ सदस्यों ने कड़ा रुख अपनाया:
* एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट: श्री फैजल रिजवी ने झारखंड की तर्ज पर तैयार छत्तीसगढ़ के ड्राफ्ट को शीघ्र लागू करवाने पर बल देते हुए कहा कि ‘खेती खुद के सेती’ की भावना के साथ अधिवक्ताओं को अपने अधिकारों के लिए सक्रिय टीम बनानी होगी। श्री ब्रजेश नाथ पाण्डेय एवं सुश्री समीनद रहमान ने भी आगामी विधानसभा चुनाव से पूर्व इस सुरक्षा कानून को पूर्ण रूप से लागू कराने की मांग रखी।
* ट्रिब्यूनल स्थापना हेतु जनहित याचिका: पूर्व अध्यक्ष श्री राम नारायण व्यास ने बार काउंसिल पर दबाव बनाने के लिए आंदोलनात्मक रणनीति का प्रस्ताव रखा। साथ ही NCLT (नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल) एवं CGRT जैसे ट्रिब्यूनल्स की स्थापना रायपुर में सुनिश्चित करने के लिए उच्च न्यायालय में याचिका दायर करने की आवश्यकता जताई। श्री रिजवी ने रेलवे क्लेम ट्रिब्यूनल और DRT के लिए भी संयुक्त संघर्ष का आह्वान किया।
कल्याण शुल्क, पंजीयन सरलीकरण और सामूहिक बीमा योजना
अधिवक्ता कल्याण शुल्क और सदस्यता राशि को लेकर कई सदस्यों ने महत्वपूर्ण सुझाव रखे:
* कल्याण शुल्क में रियायत: सदस्यों ने ध्यान दिलाया कि जो कल्याण शुल्क कभी 100 रुपये से प्रारंभ हुआ था, उसका वर्तमान प्रवेश शुल्क 10,000 रुपये निर्धारित है। श्री लिंकेश चंद्राकर और श्री ब्रजेश नाथ पाण्डेय ने इसे घटाने तथा नए सदस्यों के लिए पंजीयन की अनिवार्यता को सरल बनाने का पुरजोर समर्थन किया।
* सामूहिक एवं दुर्घटना बीमा: श्री सत्येंद्र सिंह ठाकुर ने कनिष्ठ अधिवक्ताओं सहित सभी पंजीकृत सदस्यों को अनिवार्य सामूहिक एवं दुर्घटना बीमा के दायरे में लाने की मांग रखी। इस पर श्री सुरेश यादव और श्री सागर पाण्डेय ने बीमा कवरेज के दायरे पर सवाल उठाते हुए इसे पारदर्शी बनाने की बात कही।
* वरिष्ठ सदस्यों का सहयोग: श्री आनंद मोहन ठाकुर ने प्रेरक सुझाव दिया कि यदि कोई युवा या जरूरतमंद अधिवक्ता सदस्यता शुल्क वहन करने में असमर्थ हो, तो वरिष्ठ अधिवक्ताओं के सहयोग से उसकी भरपाई की जा सकती है।
* राशि की वापसी व इंश्योरेंस दावा: श्री राम नारायण व्यास ने सुझाव दिया कि 10 वर्ष की सक्रिय सदस्यता अथवा 60 वर्ष की आयु पूर्ण होने पर 2 लाख की कल्याण राशि में से 50% (1 लाख रुपये) अधिवक्ताओं को रिंबर्स (वापस) किया जाना चाहिए। वहीं श्री दीपक दीवान ने 2011 से 2013 के दौरान प्रारंभ कल्याण राशि की प्रतिपूर्ति सीधे बीमा कंपनियों के माध्यम से कराने का सुझाव दिया।
प्रशासनिक व्यवस्था, आवासीय कॉलोनी और इंटर्नशिप नियम
* पार्किंग संचालन व इंटर्न कोड: श्री राजकुमार कुशवाहा ने सुझाव दिया कि न्यायालय की पार्किंग व्यवस्था का संचालन स्वयं अधिवक्ता संघ करे और शुल्क भी संघ द्वारा ही वसूला जाए। साथ ही, उन्होंने कानूनी पेशे की गरिमा बनाए रखने के लिए इंटर्नशिप करने वाले विधि छात्रों को अधिवक्ताओं का मूल यूनिफॉर्म पहनने से रोकने का कड़ा नियम बनाने की बात कही।
* मेमो व वकालतनामा की एकरूपता: श्री कुशवाहा एवं श्रीमती उर्वशी अग्रवाल ने कल्याण संघ द्वारा जारी मेमो व वकालतनामा को समान रूप से लागू करने तथा रायपुर बार के सदस्यों को अनुग्रह राशि का पूर्ण हकदार बनाए जाने की वकालत की।
* महिला वकीलों के लिए कॉमन रूम: सुश्री समीनद रहमान ने महिला अधिवक्ताओं के लिए सभी सुविधाओं से युक्त स्वतंत्र महिला कॉमन रूम की मांग प्रमुखता से उठाई।
* अधिवक्ता आवासीय कॉलोनी: श्री रमेश साहू ने वकीलों के लिए रियायती दर पर शासकीय भूमि आबंटित कराकर एक आधुनिक अधिवक्ता कॉलोनी के निर्माण की मांग शासन के समक्ष रखने का प्रस्ताव दिया।
* गुटबाजी की समाप्ति पर सराहना: वरिष्ठ अधिवक्ता श्री मातामणि तिवारी ने आम सभा में चुनिंदा सदस्यों को बुलाने की पुरानी परिपाटी को तोड़ने और बार रूम में गुटबाजी को तिलांजलि देकर सभी को साथ लेकर चलने की इस नई पहल का स्वागत करते हुए मंच को बधाई दी।
सभा के दौरान श्री विजय सागरकर सहित अन्य कई अधिवक्ताओं ने भी अपने विचार रखे। अध्यक्ष महोदय ने सभी सदस्यों के सुझावों का स्वागत करते हुए आश्वस्त किया कि संघ की कार्यसमिति इन प्रस्तावों पर त्वरित और ठोस निर्णय लेगी। अंत में सभा का समापन आभार प्रदर्शन के साथ हुआ।

