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Chhattisgarh Folk Art : स्वतंत्रता दिवस पर छत्तीसगढ़ का गौरव बढ़ेगा, राष्ट्रपति भवन में गूंजेगी गुट्टा मांदर की थाप

Chhattisgarh Folk Art : धमतरी। स्वतंत्रता दिवस इस बार छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति और पारंपरिक कला के लिए खास गौरव लेकर आ रहा है। 15 अगस्त को नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन में छत्तीसगढ़ की पारंपरिक लोकनृत्य शैली की गूंज सुनाई देगी। धमतरी जिले के नगरी विकासखंड के ग्राम सरईटोला (गुडरापार) के कलाकार राष्ट्रीय मंच पर गुट्टा मांदर नृत्य की प्रस्तुति देकर प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का प्रदर्शन करेंगे।

राष्ट्रपति भवन में होगी विशेष प्रस्तुति

स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर राष्ट्रपति भवन में आयोजित कार्यक्रम में देश के अलग-अलग हिस्सों की लोककलाओं और सांस्कृतिक परंपराओं को मंच दिया जाता है। इसी कड़ी में छत्तीसगढ़ के कलाकारों को भी अपनी पारंपरिक कला प्रस्तुत करने का अवसर मिला है।

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सरईटोला के कलाकार गुट्टा मांदर नृत्य की प्रस्तुति के जरिए छत्तीसगढ़ की आदिवासी और ग्रामीण संस्कृति की जीवंत झलक पेश करेंगे। राष्ट्रीय स्तर पर होने वाली यह प्रस्तुति कलाकारों के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।

गुट्टा मांदर की खास पहचान

गुट्टा मांदर छत्तीसगढ़ की लोकसांस्कृतिक परंपरा से जुड़ी नृत्य शैली है। इसमें पारंपरिक वाद्ययंत्रों की थाप के साथ कलाकार सामूहिक रूप से नृत्य प्रस्तुत करते हैं। मांदर की गूंज और कलाकारों की लयबद्ध प्रस्तुति लोकजीवन, उत्सव और सामुदायिक भावना को दर्शाती है।

यह नृत्य केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखने का जरिया भी है।

ग्रामीण कलाकारों को मिला राष्ट्रीय मंच

ग्राम सरईटोला के कलाकारों के लिए राष्ट्रपति भवन जैसे प्रतिष्ठित मंच पर प्रस्तुति देना गौरव का विषय है। इससे गांव की पारंपरिक कला को राष्ट्रीय पहचान मिलने के साथ युवा पीढ़ी को भी अपनी लोकसंस्कृति से जुड़ने की प्रेरणा मिलेगी।

कलाकारों का कहना है कि वे इस अवसर को लेकर उत्साहित हैं और अपनी प्रस्तुति के माध्यम से छत्तीसगढ़ की संस्कृति को देश के सामने रखने के लिए पूरी तैयारी कर रहे हैं।

राष्ट्रीय मंच पर गुट्टा मांदर की प्रस्तुति से छत्तीसगढ़ की लोककला और सांस्कृतिक विविधता को व्यापक पहचान मिलने की उम्मीद है। प्रदेश की ग्रामीण और आदिवासी परंपराओं में लोकगीत, लोकनृत्य और पारंपरिक वाद्ययंत्रों का विशेष महत्व रहा है।

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