Jagannath Rath Yatra 2026 : नई दिल्ली। भगवान जगन्नाथ की विश्वप्रसिद्ध रथ यात्रा से पहले ज्येष्ठ पूर्णिमा पर आयोजित होने वाले महास्नान (देव स्नान पूर्णिमा) का विशेष धार्मिक महत्व है। इस दिन भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र, देवी सुभद्रा और भगवान सुदर्शन का 108 कलशों के सुगंधित एवं पवित्र जल से अभिषेक किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, लंबे समय तक स्नान कराने के बाद महाप्रभु अस्वस्थ हो जाते हैं और इसके बाद मंदिर के कपाट करीब 15 दिनों के लिए बंद कर दिए जाते हैं।

15 दिनों तक नहीं होंगे महाप्रभु के दर्शन
महास्नान के बाद भगवान जगन्नाथ को ‘अनवसर’ (Anasara) काल में एकांतवास कराया जाता है। इस दौरान उन्हें गर्भगृह में विश्राम कराया जाता है और केवल सेवायत पुजारी वैद्य की तरह उनकी सेवा एवं उपचार करते हैं। इस अवधि में आम श्रद्धालुओं को भगवान के दर्शन की अनुमति नहीं होती।
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कब खुलेंगे मंदिर के कपाट?
धार्मिक परंपरा के अनुसार, लगभग 15 दिनों के विश्राम के बाद भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा स्वस्थ माने जाते हैं। इसके बाद रथ यात्रा से एक दिन पहले नवयौवन दर्शन होते हैं, जब भक्त लंबे इंतजार के बाद महाप्रभु के दर्शन कर पाते हैं।
Jagannath Rath Yatra 2026 कब है?
पंचांग के अनुसार, आषाढ़ शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि 15 जुलाई 2026 को सुबह 11:50 बजे शुरू होगी और 16 जुलाई 2026 को सुबह 8:52 बजे समाप्त होगी। उदया तिथि के अनुसार जगन्नाथ रथ यात्रा 16 जुलाई 2026 को निकाली जाएगी। वहीं, 24 जुलाई 2026 को बहुदा यात्रा के साथ यह भव्य उत्सव संपन्न होगा।
रथ यात्रा की खास परंपराएं
भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा में लाखों श्रद्धालु शामिल होते हैं। विशाल रथों को श्रद्धालु स्वयं रस्सियों से खींचते हैं, जिनमें किसी भी पशु का उपयोग नहीं किया जाता। रथ यात्रा शुरू होने से पहले पुरी के गजपति महाराज द्वारा ‘छेरा पहरा’ की परंपरा निभाई जाती है, जिसमें सोने की झाड़ू से रथों और मार्ग की प्रतीकात्मक सफाई की जाती है। यह परंपरा समानता और सेवा भाव का संदेश देती है।

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