मानव सुथार का टीम इंडिया में टेस्ट डेब्यू— राजस्थान के सीमावर्ती जिले श्रीगंगानगर के रहने वाले युवा क्रिकेटर मानव सुथार ने भारतीय टेस्ट क्रिकेट टीम में अपना पदार्पण (डेब्यू) कर लिया है। उनके इस ऐतिहासिक पल के गवाह बनने के लिए उनके पिता और सेवानिवृत्त शिक्षक जगदीश सुथार पूरे परिवार के साथ पंजाब के मुल्लांपुर (महाराजा यादविंद्र सिंह अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम) पहुंचे थे। हालांकि, एक हैरान करने वाले घटनाक्रम में, मानव के पिता मैच के दूसरे दिन अपने बेटे का मैदान पर लाइव प्रदर्शन देखे बिना ही वापस श्रीगंगानगर लौट आए।
मानव सुथार का टीम इंडिया में टेस्ट डेब्यू, मुल्लांपुर मैच देखने पहुंचे पिता बिना खेल देखे ही घर लौटे

बेटे की कामयाबी और मैदान से पिता की अचानक रवानगी
मानव सुथार के भारतीय टीम की जर्सी पहनने की खबर से श्रीगंगानगर के सुखाड़िया नगर और आसपास के इलाकों में जश्न का माहौल है। बेटे को देश के लिए खेलता देखना हर पिता का सपना होता है, और इसी सपने को जीने के लिए जगदीश सुथार मुल्लांपुर स्टेडियम की स्टैंड्स में मौजूद थे। मैच के पहले दिन का खेल देखने के बाद, वे दूसरे दिन की सुबह ही अचानक अपने परिवार के साथ वापस राजस्थान के लिए रवाना हो गए। स्थानीय लोगों में इस बात को लेकर काफी चर्चा रही, लेकिन पारिवारिक सूत्रों के मुताबिक कुछ अनिवार्य घरेलू कारणों और जिम्मेदारियों के चलते उन्हें यह फैसला अचानक लेना पड़ा।
बचपन के कोच धीरज शर्मा की मेहनत लाई रंग
जगदीश सुथार खुद एक शारीरिक शिक्षा शिक्षक (पीटी टीचर) रहे हैं। उन्होंने हमेशा मानव को खेल को करियर के रूप में चुनने के लिए प्रेरित किया। जब मानव महज छह या सात साल का था, तब वह सुखाड़िया नगर की गलियों में टेनिस और रबड़ की गेंद से क्रिकेट खेलता था। उसकी प्रतिभा को भांपते हुए पिता ने उसे करीब 10-11 साल की उम्र में स्थानीय क्रिकेट कोच धीरज शर्मा की अकादमी में दाखिला दिला दिया था। मानव ने क्रिकेट की शुरुआती बारीकियां और स्पिन गेंदबाजी के गुर धीरज शर्मा से ही सीखे हैं।
ज़मीन से जुड़े पिता का बयान: ‘क्रेडिट सिर्फ मानव और उसके कोच को’
अपनी इस बड़ी सफलता पर मानव के पिता जगदीश सुथार ने पारंपरिक बड़प्पन दिखाते हुए खुद कोई श्रेय नहीं लिया। उन्होंने कहा कि एक पिता के तौर पर उन्होंने सिर्फ अपना फर्ज निभाया है, असली हकदार मानव खुद है।
“यह पूरी तरह से मानव की कड़ी मेहनत और उसके घंटों के अभ्यास का नतीजा है। वह सुबह ट्रेनिंग के लिए घर से निकलता था और देर शाम लौटता था। इसका श्रेय उसे और उसके बचपन के कोच धीरज शर्मा को जाता है जिनके हम सब कृतज्ञ हैं। मानव ने अपना सारा क्रिकेट उन्हीं से सीखा। मैंने तो बस उससे इतना कहा था कि तुझे जो अच्छा लगे, तू कर, मेरा समर्थन हमेशा तेरे साथ रहेगा।”
श्रीगंगानगर में जश्न और आगे का रास्ता
मानव सुथार के टेस्ट टीम में शामिल होने से श्रीगंगानगर के स्थानीय खेल मैदानों और क्लबों में युवा खिलाड़ियों का जोश बढ़ गया है। जिला क्रिकेट संघ और स्थानीय खेल प्रेमियों का कहना है कि मानव की यह उपलब्धि जिले के अन्य बच्चों को भी राष्ट्रीय स्तर पर चमकने के लिए प्रेरित करेगी। मानव सुथार बाएं हाथ के स्पिनर और एक उपयोगी निचले क्रम के बल्लेबाज हैं, और स्थानीय जानकारों का मानना है कि अपनी सटीक लाइन-लेंथ के दम पर वे भारतीय टीम में लंबे समय तक अपनी जगह मजबूत रख सकते हैं।

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