Pradosh Vrat 2026: नई दिल्ली। सनातन धर्म में भगवान शिव की आराधना के लिए प्रदोष व्रत का विशेष महत्व माना गया है। यह व्रत हर महीने कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन विधि-विधान से भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने से भक्तों के सभी दुख-दर्द दूर हो जाते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है।
ज्योतिष और धर्म शास्त्रों के अनुसार, सप्ताह के अलग-अलग दिनों में पड़ने वाले प्रदोष व्रत का महत्व और उसका फल भी अलग-अलग होता है। हर प्रदोष व्रत विशेष मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए शुभ माना गया है।
जानिए किस दिन का प्रदोष व्रत देता है कौन-सा लाभ

सोम प्रदोष व्रत
सोमवार को पड़ने वाले प्रदोष व्रत को सोम प्रदोष कहा जाता है। यह व्रत मानसिक शांति, उत्तम स्वास्थ्य और चंद्र दोष को दूर करने के लिए बेहद शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस व्रत से भगवान शिव भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं।
भौम प्रदोष व्रत
मंगलवार को आने वाला प्रदोष व्रत भौम प्रदोष कहलाता है। यह व्रत कर्ज से मुक्ति, आर्थिक परेशानियों से छुटकारा और मंगल दोष को शांत करने के लिए रखा जाता है।
बुध प्रदोष व्रत
बुधवार के दिन पड़ने वाला प्रदोष व्रत बुद्धि, ज्ञान और करियर में सफलता दिलाने वाला माना गया है। जिन लोगों के कामों में बार-बार रुकावट आती है, उनके लिए यह व्रत अत्यंत फलदायी माना जाता है।
गुरु प्रदोष व्रत
गुरुवार को पड़ने वाला प्रदोष व्रत शत्रुओं से रक्षा और वैवाहिक जीवन में सुख-शांति के लिए महत्वपूर्ण माना गया है। इससे घर-परिवार में समृद्धि आती है।
शुक्र प्रदोष व्रत
शुक्रवार को रखा गया प्रदोष व्रत धन, वैभव, सौभाग्य और आकर्षण में वृद्धि करने वाला माना जाता है। यह व्रत सुख-सुविधाओं में बढ़ोतरी का प्रतीक माना गया है।
शनि प्रदोष व्रत
शनिवार को आने वाला प्रदोष व्रत विशेष रूप से संतान प्राप्ति, नौकरी में तरक्की और शनि दोष से राहत पाने के लिए बेहद शुभ माना जाता है।
रवि प्रदोष व्रत
रविवार के दिन पड़ने वाला प्रदोष व्रत लंबी आयु, उत्तम स्वास्थ्य और समाज में मान-सम्मान दिलाने वाला माना गया है।
प्रदोष व्रत की पूजा का सही समय
धार्मिक मान्यता के अनुसार, प्रदोष व्रत का पूर्ण फल तभी प्राप्त होता है जब पूजा प्रदोष काल में की जाए। प्रदोष काल सूर्यास्त के बाद का समय होता है। इस दौरान भगवान शिव का जल, दूध और बेलपत्र से अभिषेक करना अत्यंत शुभ माना गया है। पूजा के अंत में शिव आरती और मंत्र जाप करने से भोलेनाथ की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

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