Varada Chaturthi 2026 : नई दिल्ली। सनातन धर्म में गणेश जी की आराधना के लिए चतुर्थी तिथि को सबसे उत्तम माना गया है। लेकिन जब यह चतुर्थी मलमास (अधिकमास) में पड़े और उस पर बुधवार का दुर्लभ संयोग बन जाए, तो इसका आध्यात्मिक महत्व कई हजार गुना बढ़ जाता है। इस साल अधिकमास की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को ‘वरदा विनायक चतुर्थी’ के रूप में मनाया जाएगा, जो इस बार 20 मई 2026, बुधवार को पड़ रही है।
शास्त्रों में ‘वरदा’ का अर्थ ‘वरदान देने वाली’ बताया गया है। मान्यता है कि बुधवार के दिन भगवान गणेश के इस विशेष स्वरूप की पूजा करने से जीवन के सभी संकट टल जाते हैं और साधक को रिद्धि-सिद्धि के साथ सुख-समृद्धि का वरदान मिलता है।
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साल की 12 चतुर्थियों के बराबर है इसका फल
भविष्यपुराण और मुद्गलपुराण के अनुसार, अधिकमास (जिसे पुरुषोत्तम मास भी कहते हैं) भगवान विष्णु को समर्पित है, इसलिए इस पूरे महीने में किए गए दान, जप और तप का फल अनंत गुना होता है।
धार्मिक मान्यता’ मलमास में आने वाली वरदा विनायक चतुर्थी का व्रत रखने और भगवान गणेश की पूजा करने से साल भर की सभी 12 चतुर्थियों के व्रत के समान पुण्य फल प्राप्त होता है। यह दिन उन लोगों के लिए वरदान समान है जिनके कार्यों में बार-बार बाधाएं (विघ्न) आती हैं।
वरदा चतुर्थी 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त
हिंदू पंचांग के अनुसार, इस बार चतुर्थी तिथि का विस्तार दो दिनों तक रहेगा, लेकिन उदयातिथि और मध्याह्न पूजा काल के कारण 20 मई को ही मुख्य व्रत और पूजा की जाएगी।
| विशेष घटना | समय और तिथि |
| चतुर्थी तिथि प्रारंभ | 19 मई 2026 को दोपहर 02:18 बजे से |
| चतुर्थी तिथि समाप्त | 20 मई 2026 को सुबह 11:06 बजे तक |
| चतुर्थी मध्याह्न पूजा मुहूर्त | सुबह 10:56 से सुबह 11:06 तक |
| वर्जित चंद्रदर्शन का समय | सुबह 08:43 से रात 11:08 बजे तक (इस दौरान चंद्र दर्शन से कलंक लगता है) |
बुधवार का संयोग क्यों है बेहद खास?
भगवान गणेश को बुध ग्रह का कारक और स्वामी माना जाता है। ऐसे में बुधवार के दिन वरदा चतुर्थी का आना एक अत्यंत दुर्लभ और शुभ संयोग है। जिन लोगों की कुंडली में बुद्ध ग्रह कमजोर है, व्यापार में घाटा हो रहा है या बुद्धि-एकाग्रता की कमी है, उनके लिए 20 मई का दिन किसी सुनहरे मौके से कम नहीं है।
बप्पा को प्रसन्न करने के चमत्कारी मंत्र
वरदा चतुर्थी के दिन सुबह स्नान करके लाल या पीले वस्त्र धारण करें। मध्याह्न मुहूर्त में बप्पा की मूर्ति के सामने दीपक जलाएं और उन्हें दूर्वा (दूब घास), मोदक और सिंदूर अर्पित करें। सिंदूर चढ़ाते समय इस विशेष मंत्र का उच्चारण करें:
इसके अलावा मनोकामना पूर्ति के लिए इन मंत्रों का जाप करें:
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गणेश गायत्री मंत्र: ॐ एकदन्ताय विद्महे वक्रतुण्डाय धीमहि तन्नो दन्ती प्रचोदयात।
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संकट नाशन मंत्र: ॐ गं गणपतये नमः।
भूलकर भी न करें ये गलती
ध्यान रहे कि विनायक चतुर्थी के दिन चंद्रमा को देखना वर्जित माना गया है। मान्यताओं के अनुसार, इस दिन चंद्र दर्शन करने से मनुष्य पर झूठा आरोप या कलंक लगने का खतरा रहता है। इसलिए 20 मई को रात के समय आसमान में चंद्रमा की तरफ देखने से बचें।

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