बिलासपुर — Virat Kidnapping Case में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। डिवीजन बेंच ने सभी 5 दोषियों की अपील खारिज करते हुए उम्रकैद की सजा बरकरार रखी। कोर्ट ने साफ कहा कि इस तरह के अपराध समाज में भय का माहौल पैदा करते हैं और ऐसे मामलों में नरमी नहीं बरती जा सकती।
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हाईप्रोफाइल केस में अदालत की सख्त टिप्पणी
चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि अपहरण जैसे अपराध सिर्फ एक परिवार को नहीं तोड़ते, बल्कि पूरे समाज में असुरक्षा का माहौल बनाते हैं। अदालत ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को सही मानते हुए दोषियों को राहत देने से इनकार कर दिया।
यह मामला लंबे समय से प्रदेश में चर्चा का विषय रहा है। सुनवाई के दौरान अदालत में सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ाई गई थी। कोर्ट रूम के बाहर परिवार के सदस्य और अधिवक्ता फैसले का इंतजार करते दिखे। माहौल भारी था। हर किसी की नजर सिर्फ एक बात पर टिकी थी—क्या सजा बरकरार रहेगी? अदालत ने कहा कि मामले में प्रस्तुत सबूत, गवाहों के बयान और जांच की प्रक्रिया पर्याप्त और विश्वसनीय पाई गई। इसी आधार पर दोषियों की अपील खारिज की गई।
परिवार ने फैसले को बताया न्याय की जीत
फैसले के बाद पीड़ित पक्ष ने राहत जताई। परिवार के करीबियों का कहना है कि वर्षों की कानूनी लड़ाई के बाद उन्हें न्याय मिला है। कोर्ट के बाहर कुछ लोगों की आंखों में आंसू थे। तनाव साफ दिखाई दे रहा था। कानूनी जानकार मानते हैं कि इस फैसले का असर आने वाले अपहरण और संगठित अपराध से जुड़े मामलों पर भी पड़ेगा। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में यह संकेत दिया कि गंभीर अपराधों में अदालतें सख्त रुख अपनाएंगी।

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