Naxalite Surrender : जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में नक्सल उन्मूलन अभियान और सरकार की नई पुनर्वास नीति का बड़ा असर देखने को मिल रहा है। सोमवार को जगदलपुर में सुरक्षा बलों के सामने एक खूंखार महिला नक्सली लक्ष्मी ने आत्मसमर्पण कर दिया। लक्ष्मी पर राज्य सरकार द्वारा 5 लाख रुपए का इनाम घोषित था। वह लंबे समय से छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के सीमावर्ती इलाकों (ट्राई-जंक्शन) में सक्रिय थी और कई बड़ी वारदातों में शामिल रही है।
खोखली विचारधारा से हुआ मोहभंग
पुलिस अधिकारियों के समक्ष आत्मसमर्पण के दौरान महिला नक्सली ने बताया कि वह संगठन की भेदभावपूर्ण नीति और खोखली विचारधारा से तंग आ चुकी थी। उसने माओवादी संगठन के भीतर महिलाओं के साथ होने वाले दुर्व्यवहार और बाहरी दबाव से परेशान होकर मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया।
सीमावर्ती इलाकों में थी दहशत का पर्याय
नक्सली लक्ष्मी छत्तीसगढ़-आंध्र-तेलंगाना बॉर्डर पर सक्रिय माओवादी दस्ते की एक महत्वपूर्ण कड़ी मानी जाती थी। उसकी सक्रियता के कारण इन तीनों राज्यों की पुलिस को लंबे समय से उसकी तलाश थी। पुलिस का मानना है कि उसके सरेंडर से संगठन के सूचना तंत्र और सीमावर्ती इलाकों में उनकी पकड़ को बड़ा नुकसान पहुँचा है।
पुनर्वास नीति का मिल रहा लाभ
बस्तर के पुलिस महानिरीक्षक (IG) और पुलिस अधीक्षक (SP) ने बताया कि आत्मसमर्पण करने वाली लक्ष्मी को राज्य सरकार की ‘नई पुनर्वास नीति’ के तहत तत्काल सहायता राशि प्रदान की जाएगी। साथ ही उसे समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए आवास और रोजगार के अवसर भी उपलब्ध कराए जाएंगे।
‘पून नारकोम’ अभियान की सफलता
अधिकारियों के अनुसार, बस्तर पुलिस द्वारा चलाए जा रहे ‘पून नारकोम’ (नई सुबह) अभियान के तहत नक्सली लगातार हिंसा का रास्ता छोड़ रहे हैं। इस साल अब तक सैकड़ों नक्सलियों ने सरेंडर किया है, जिससे यह उम्मीद जागी है कि बस्तर जल्द ही नक्सल मुक्त क्षेत्र बनेगा।

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