बैठक में गरमा गया माहौल
बताया जा रहा है कि क्षेत्र में जमीन नामांतरण, सीमांकन और राजस्व रिकॉर्ड से जुड़े मामलों में लंबे समय से शिकायतें मिल रही थीं। इसी को लेकर समीक्षा बैठक बुलाई गई थी। जैसे ही लंबित प्रकरणों की फाइलें सामने आईं, माहौल बदल गया। विधायक ने अधिकारियों से सीधे सवाल पूछने शुरू कर दिए।
कमरे में कुछ पल के लिए सन्नाटा छा गया। कई अधिकारी फाइलें पलटते नजर आए। विधायक ने साफ शब्दों में कहा कि जनता महीनों दफ्तरों के चक्कर काट रही है। कोई सुनवाई नहीं हो रही। लोगों के काम समय पर नहीं होंगे तो नाराजगी बढ़ेगी। सूत्रों के मुताबिक, बैठक में कई ऐसे प्रकरण सामने आए जिनमें आवेदन महीनों से लंबित थे। कुछ ग्रामीणों ने कथित तौर पर रिश्वत मांगने की शिकायत भी रखी। इसी के बाद विधायक का तेवर और सख्त हो गया।
जनता की नाराजगी पर सीधा संदेश
विधायक ने अधिकारियों को चेताते हुए कहा कि सरकारी कुर्सी सेवा के लिए होती है, रौब दिखाने के लिए नहीं। उन्होंने कहा कि गांवों में लोग परेशान हैं। किसान फसल छोड़कर तहसील कार्यालय के चक्कर लगा रहे हैं। किसी की जमीन का नक्शा अटका है तो किसी का बंटवारा। बैठक में मौजूद कुछ लोगों ने बताया कि विधायक की बातों के दौरान कई ग्रामीणों ने तालियां भी बजाईं। आप महसूस कर सकते थे कि कमरे में दबा हुआ गुस्सा बाहर आ रहा था।

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