AC First Class में ही मिलती है सबसे बड़ी राहत
भारतीय रेलवे के नियमों के अनुसार यात्री अपने पालतू कुत्ते को AC First Class के कूपे या केबिन में साथ ले जा सकते हैं। इसके लिए पूरा कूपे बुक कराना पड़ सकता है। अगर दूसरे यात्री आपत्ति दर्ज करते हैं, तो रेलवे अधिकारी कुत्ते को ब्रेक वैन में शिफ्ट करने का आदेश दे सकते हैं। रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, बिना अनुमति पालतू जानवर को सामान्य कोच या स्लीपर में ले जाना नियमों का उल्लंघन माना जाता है। ऐसे मामलों में यात्रियों से अतिरिक्त शुल्क वसूला जा सकता है। कुछ यात्रियों ने बताया कि जांच के दौरान टीटीई ने मौके पर जुर्माना भी लगाया। प्लेटफॉर्म पर कई बार बहस का माहौल बन जाता है।
क्या-क्या दस्तावेज रखना जरूरी?
- पालतू जानवर का वैक्सीनेशन सर्टिफिकेट
- फिटनेस सर्टिफिकेट
- बुकिंग रसीद
- यात्री का कन्फर्म टिकट
- पहचान पत्र
रेलवे सूत्रों के अनुसार, लंबी दूरी की यात्रा में जानवर की सुरक्षा और दूसरे यात्रियों की सुविधा दोनों को ध्यान में रखा जाता है। गर्मी के मौसम में यह नियम और सख्त हो जाते हैं। स्टेशन पर सुबह-सुबह कई यात्री अपने पालतू डॉग के साथ लाइन में दिखाई देते हैं। चेहरे पर चिंता साफ दिखती है—कहीं दस्तावेज में कमी न निकल जाए।
ब्रेक वैन में कैसे होती है बुकिंग?
अगर यात्री AC First Class में यात्रा नहीं कर रहे हैं, तो पालतू जानवर को लगेज या ब्रेक वैन में बुक कराया जा सकता है। इसके लिए रेलवे पार्सल कार्यालय में पहले से आवेदन करना पड़ता है। जानवर के वजन के हिसाब से शुल्क तय होता है। रेलवे कर्मचारियों का कहना है कि कई यात्री आखिरी समय में स्टेशन पहुंचते हैं और फिर नियमों की जानकारी न होने पर परेशानी में पड़ जाते हैं। छुट्टियों के मौसम में यह स्थिति ज्यादा देखने को मिलती है।

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