Chhattisgarh Electricity Tariff Hike 2026 , रायपुर — छत्तीसगढ़ बिजली दर बढ़ोतरी की चर्चा तेज है। 6300 करोड़ रुपये के घाटे ने पूरे सिस्टम को हिला दिया है। नई दरें अभी लागू नहीं हुईं, लेकिन जून आते-आते आम उपभोक्ताओं की जेब पर सीधा असर पड़ सकता है। फरवरी में हुई जनसुनवाई के बाद से पिछले ढाई महीनों से आयोग इस घाटे की भरपाई और उपभोक्ताओं पर पड़ने वाले बोझ के बीच संतुलन बनाने के लिए मंथन कर रहा है।
राज्य पावर कंपनी ने नियामक आयोग के सामने भारी घाटे की याचिका रखी। आंकड़ा छोटा नहीं है। 6300 करोड़ रुपये—इतना बड़ा गैप भरना आसान नहीं। फरवरी में जनसुनवाई हुई। लोग आए, बोले, विरोध भी हुआ। लेकिन फैसला? अभी भी टेबल पर अटका है। पिछले ढाई महीने से आयोग संतुलन खोज रहा है। एक तरफ कंपनियों का घाटा। दूसरी तरफ जनता की जेब। बीच में फंसा सिस्टम। यही असली लड़ाई है।
क्यों बढ़ सकती हैं दरें
बिजली उत्पादन लागत बढ़ी है। कोयले की कीमत, ट्रांसमिशन खर्च, मेंटेनेंस—सब ऊपर। रेवेन्यू उतना नहीं बढ़ा। नतीजा साफ है। घाटा बढ़ा। अब या तो सब्सिडी बढ़े, या दरें।
कोयले की लागत में लगातार बढ़ोतरी
ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन लॉस
बकाया बिलों की वसूली में कमी
सब्सिडी का दबाव
एक अधिकारी ने ऑफ द रिकॉर्ड कहा—फैसला आसान नहीं। “हर यूनिट पर कुछ पैसे बढ़ते हैं तो भी असर बड़ा होता है।”
“प्रशासन और जनता के बीच का सेतु”
चॉइस एवं सामान्य सेवा सुविधाओं के माध्यम से जनसेवा ही मेरा मुख्य आधार है। एक वकील, संपादक और लेखक के रूप में मेरी भूमिका लाभार्जन के लिए नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाने और व्यवस्था को मजबूत करने के लिए है।
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