रायगढ़ : छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले से विवाह की एक ऐसी परंपरा सामने आई है, जो न केवल अनोखी है बल्कि साहस और अटूट आस्था की मिसाल भी है। आधुनिक दौर में जहां शादियां होटल और मैरिज गार्डन्स तक सीमित हो गई हैं, वहीं रायगढ़ के एक गांव में दूल्हा-दुल्हन विवाह की रस्मों के दौरान जलते हुए अंगारों पर चलकर अपनी नई जिंदगी की शुरुआत कर रहे हैं।
क्या है यह अनोखी परंपरा?
यह दिलचस्प वाकया जिला मुख्यालय से महज 20 किलोमीटर दूर स्थित बिलासपुर गांव का है। यहां राठिया समाज के गंधेल गोत्र के परिवारों में विवाह की यह रस्म सदियों से चली आ रही है। इस समुदाय में शादी केवल सात फेरों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि आग की तपिश के बीच से गुजरना इसे पूर्णता प्रदान करता है।
शादी के मुख्य कार्यक्रमों के बाद, जब दुल्हन को ससुराल लाया जाता है, तब वहां घर के देवी-देवताओं की विशेष पूजा की जाती है। इसी पूजा प्रक्रिया का हिस्सा है—जलते हुए अंगारों पर चलना।
आस्था और साहस का प्रतीक
इस परंपरा को लेकर गांव के बुजुर्गों का कहना है कि यह केवल एक रस्म नहीं, बल्कि अग्नि देव के समक्ष अपनी निष्ठा और नए जीवन के लिए आशीर्वाद लेने का तरीका है।
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कैसे निभाई जाती है रस्म: पूजा स्थल पर अंगारे तैयार किए जाते हैं, जिसके ऊपर से दूल्हा और दुल्हन को एक साथ गुजरना होता है। स्थानीय लोगों का मानना है कि इस दौरान दूल्हा-दुल्हन को अग्नि देव का संरक्षण प्राप्त होता है, जिससे उनका आने वाला जीवन खुशहाल और कष्टों से मुक्त रहता है।
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पीढ़ियों से जारी: यह परंपरा राठिया परिवार में पीढ़ी-दर-पीढ़ी चली आ रही है। आज के दौर में जब लोग अपनी जड़ों से दूर हो रहे हैं, तब भी बिलासपुर गांव के लोग पूरे विश्वास और श्रद्धा के साथ इस पुरानी रस्म को निभा रहे हैं।
आश्चर्य और चर्चा का केंद्र
जैसे ही यह जानकारी बाहर आई, लोग इसे देखकर हैरान रह गए। सोशल मीडिया पर इस परंपरा की चर्चा जोरों पर है। हालांकि कुछ लोग इसे जोखिम भरा मान सकते हैं, लेकिन स्थानीय समुदाय इसे पूरी तरह से अपनी संस्कृति और विश्वास से जोड़कर देखता है। उनके लिए जलते अंगारों पर चलना भय का नहीं, बल्कि महादेव और अग्नि देव के प्रति समर्पण का प्रतीक है।

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