घटना के बाद मामला बस्तर थाना पहुंचा, जहां विशेष समुदाय के लोगों ने आवेदन देकर शिकायत दर्ज कराई। समुदाय की ओर से परिवार के साथ मारपीट, गाली-गलौज और डराने-धमकाने के आरोप लगाए गए। वहीं ग्रामीणों का कहना है कि बाहरी व्यक्ति गांव में स्थायी रूप से न रहे और गांव में धर्म प्रचार जैसी गतिविधियां बंद हों, इसी मांग को लेकर विरोध किया गया।
गांव की शांति टूटी, आरोपों ने आग में घी डाला
गांव आम दिनों में शांत रहता है। खेत, कच्ची सड़कें, और रोजमर्रा की जिंदगी। लेकिन इस बार माहौल बदल गया। कुछ ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि बाहरी परिवार धार्मिक गतिविधियां कर रहा है। बात फैलते देर नहीं लगी। देखते ही देखते बहस तेज हुई। आवाजें ऊंची हुईं। फिर धक्का-मुक्की। हालात बिगड़े और मारपीट की स्थिति बन गई। पास्टर पक्ष ने भी अपने साथ दुर्व्यवहार का आरोप लगाया है। एक स्थानीय युवक ने बताया, “अचानक भीड़ जुट गई। कोई समझाने वाला नहीं था। माहौल एकदम गर्म हो गया।” उस वक्त गांव की हवा भारी लग रही थी—जैसे कुछ बड़ा होने वाला हो।

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