तैयारी पूरी, लेकिन तस्वीर धुंधली
सूत्रों के मुताबिक, एक छोटा ईरानी प्रतिनिधिमंडल इस्लामाबाद पहुंच चुका है। शहर में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। सड़कें चेकपोस्ट से भरी हैं। हर मोड़ पर निगरानी। लेकिन कहानी में ट्विस्ट है। अमेरिकी पक्ष से जुड़े नाम—जैसे आधिकारिक तौर पर कन्फर्म नहीं हैं। यानी तैयारी दिख रही है, लेकिन आधिकारिक मुहर अभी नहीं लगी।
कूटनीति की चाल, या सिर्फ संकेत?
US और के बीच बातचीत कोई नई बात नहीं। लेकिन लोकेशन बदली तो सवाल उठे। इस्लामाबाद को मंच बनाना—यह रणनीति हो सकती है। या फिर सिर्फ एक संकेत।एक वरिष्ठ विश्लेषक ने कहा, “जब बातचीत होती है, तो हर कदम मैसेज देता है। यहां मैसेज साफ नहीं है।”

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