जंगल में घात, फिर सीधी भिड़ंत
ऑपरेशन सुबह शुरू हुआ। इंटेलिजेंस इनपुट साफ था—जंगल के अंदर मूवमेंट है। जवानों ने घेराबंदी की। कुछ मिनट सन्नाटा। फिर अचानक फायरिंग। जवाब तुरंत मिला। करीब आधे घंटे चली इस मुठभेड़ में सुरक्षाबलों ने बढ़त बनाई। मौके पर एक महिला नक्सली का शव बरामद हुआ, जिसकी पहचान बाद में ACM (Area Committee Member) के तौर पर हुई। सूत्र बताते हैं, रूपी लंबे समय से सक्रिय थी। लोकल नेटवर्क, लॉजिस्टिक्स और मूवमेंट—सबमें उसकी पकड़ थी।
बस्तर के समीकरण बदलेंगे?
यह सिर्फ एक एनकाउंटर नहीं। यह एक संकेत है। बस्तर में बड़े कैडर की मौजूदगी लगातार घट रही है। हालांकि “आखिरी” जैसे दावे अक्सर जमीनी हकीकत से बड़े होते हैं, लेकिन यह साफ है कि संगठन को झटका लगा है। जंगल की खामोशी में अब दबाव साफ दिखता है। ऑपरेशन की तीव्रता बढ़ी है। जवान अब सिर्फ जवाब नहीं दे रहे—वे तलाश कर रहे हैं, पकड़ रहे हैं, खत्म कर रहे हैं।
“ऑपरेशन पूरी तैयारी से किया गया था। हमें इनपुट मिला था और जवानों ने बहादुरी से काम किया। यह बड़ी सफलता है।” — निखिल राखेचा, एसपी कांकेर
अब नजर बाकी नेटवर्क पर है। ऐसे ऑपरेशन के बाद आमतौर पर दो चीजें होती हैं—या तो कैडर और अंदर चला जाता है, या जवाबी गतिविधि बढ़ती है। सुरक्षाबलों के लिए चुनौती खत्म नहीं हुई। बल्कि असली टेस्ट अब शुरू होता है। इलाके में सर्च ऑपरेशन जारी है। जंगल अभी भी पूरी तरह शांत नहीं है।

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